'अब तक कानों में गोलियों की आवाज गूंज रही':मोतिहारी में 2 बदमाशों का एनकाउंटर; चश्मदीद बोला- 50 राउंड फायरिंग हुई, लगा किसी जंग में खड़े हैं

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“मैं सो रहा था। रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पहले लगा कि शायद पटाखा फूटा हो, लेकिन कुछ ही सेकेंड बाद दूसरी गोली चली और फिर शोर-शराबा शुरू हो गया। आवाज इतनी डरावनी थी कि मैं घबराकर बिस्तर पर ही उठकर बैठ गया। जब बाहर निकलकर देखा तो मेरे घर से करीब 30 मीटर दूर संत के घर को 20 से 30 पुलिसकर्मियों ने घेर रखा था। उनके हाथों में बंदूकें थीं।” यह कहना है मोतिहारी के चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव के राजेश (बदला हुआ नाम) का। इन्होंने सोमवार देर रात हुए STF-पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ को अपनी आंखों से देखा था। राजेश ने बताया- दोनों तरह से लगातार ताबड़तोड़ गोलियां चल रही थी। करीब 50 से ज्यादा राउंड फायरिंग की गई। घटना के कई घंटे बाद तक ऐसा लग रहा था कि वही आवाजें फिर से कानों में गूंज रही हैं…धड़-धड़-धड़…। पुलिस एनकाउंटर में 2 बदमाश ढेर दरअसल, सोमवार की रात 2.30 बजे स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। STF ने दो बदमाशों को मार गिराया। इस दौरान एक जवान को भी गोली गली, जिसका इलाज के दौरान मौत हो गई। मुठभेड़ चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव में हुई। मृतक जवान की पहचान श्रीराम यादव (31) के रूप में हुई है। वहीं, मारे गए अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे हैं। दोनों चकिया थाना इलाके के रहने वाले थे। दोनों पर आर्म्स एक्ट में केस दर्ज थे। कुंदन ठाकुर पर चकिया थाने में तीन और साहेबगंज थाने में लूट सहित 5 केस दर्ज थे। पुलिस को मौके से एक कार्बाइन, 2 पिस्टल, 2 कट्टे, 5 जिंदा कारतूस और 17 खोखे बरामद किए। एनकाउंटर से पहले बदमाश कुंदन ठाकुर ने दरोगा से कहा था कि मैं 15 पुलिस कर्मी की लाश बिछा दूंगा। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने चकिया के सिहोरवा निवासी उज्ज्वल कुमार और संत कुमार तिवारी को भी गिरफ्तार किया है। ये दोनों पिता-बेटे हैं। इनके खिलाफ भी पहले से कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस को शक है कि ये अपराधियों को शरण देने और उनके नेटवर्क का हिस्सा थे। 50 राउंड से ज्यादा चली गोलियां एनकाउंटर की इस घटना के बाद भास्कर की टीम रामडीहा गांव पहुंची। वहां पहले किसी ने भी बात करने से मना कर दिया। वहीं नाम न बताने की शर्त पर एक युवक ने वारदात की आंखों-देखी बताई। राजेश (बदला हुआ नाम) ने बताया, “सोमवार की रात मैं सो रहा था। अचानक 2-3 राउंड फायरिंग की आवाज सुनाई दी तो मैं डरते-डरते घर से बाहर निकला। मेरे घर से 30 मीटर दूर संत तिवारी का घर है। देखा कि चारों तरफ पुलिस की टीम मौजूद थी। अंधेरा अधिक होने की वजह से साफ कुछ नहीं दिख रहा था।” उसने आगे बताया, “घर के अंदर से भी गोलियां चल रही थी। दोनों तरफ से ताबड़तोड़ गोलियां चल रही थीं। ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी युद्ध के बीच खड़े हैं। लगभग 50 राउंड से ज्यादा गोलियां चली होंगी। हर गोली के साथ दिल दहल जाता था। मेरे घर के लोग और आसपास के लोग जाग गए थे। बच्चे रोने लगे थे, महिलाएं भगवान का नाम लेने लगी थीं।” फायरिंग के वक्त बाहर निकलने की हिम्मत नहीं थी राजेश ने बताया, “कुछ समय बाद 30-40 पुलिसकर्मी और आ गए। उन्होंने हम सबको डांटकर कहा अंदर जाओ, दरवाजा बंद करो। हर घर के बाहर पुलिस खड़ी हो गई थी। उस वक्त लगा कि अगर बाहर रहे तो जान जा सकती है। इसके बाद हमलोगों की हिम्मत नहीं हुई कि घर से बाहर निकले। हम खिड़की से झांकते थे, फिर डरकर हट जाते थे। जिंदगी में पहली बार इतने पास से गोलियों की आवाजें सुनी थी।” दूसरे प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं, “फायरिंग थमने के बाद भी डर खत्म नहीं हुआ था। गोलियों की आवाज बंद हुईं तो हमने पुलिस वालों को कहते सुना जल्दी-जल्दी गाड़ी पर रखो, इन्हें गोली लगी है, अस्पताल ले चलो। इसके बाद कई गाड़ियां आईं और अधिकारी पहुंचने लगे। लोग खिड़कियों के पीछे से सब कुछ देख रहे थे, लेकिन बाहर निकलने की हिम्मत किसी में नहीं थी।” 3 भाई में सबसे छोटा था कुंदन वहीं, घटना को लेकर कुंदन ठाकुर की बहन ने बताया, “मेरा 3 भाई है। कुंदन सबसे छोटा था। उसने कोई गलती नहीं की थी। इसके बावजूद पुलिसवालों ने उसे मार गिराया। कुंदन बहुत ही सीधा लड़का था। घर पर सभी से इज्जत से बात करता था। मुझे घटना के बारे में फोन से पता चला है। मैंने सुबह-सुबह जब मोबाइल पर न्यूज देखी तो शौक हो गई। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं।” वहीं, कुंदन की भाभी प्रियंका देवी ने बताया, “मैं कुछ सालों से उनलोगों से अलग रहती हूं। इसके बावजूद पुलिस की टीम मेरे घर पर भी आई थी। वो लोग देवर कुंदन और पति कुणाल को ढूंढ रहे थे। छानबीन के लिए मेरे घर को तहस-नहस कर दिया था। पुलिसवालों ने मुझे थप्पड़ तक मारा। मेरा छोटा फोन अपने साथ ले गई। मैं चाहती हूं मुझे इन चीजों से दूर रखा जाए। मैं उस घर का हिस्सा नहीं हूं।” अब पढ़िए कुंदन और और प्रियांशु ने कैसे अपराध की दुनिया में रखा कदम पुलिस के मुताबिक कुंदन ठाकुर इलाके का एक कुख्यात अपराधी था। उसके खिलाफ साल 2019, 2020, 2022 और 2024 में आर्म्स एक्ट के तहत कुल 5 मामले दर्ज थे। चकिया के अलावा अन्य थानों में भी उस पर केस दर्ज थे, जबकि राजेपुर थाना क्षेत्र में भी उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमे चल रहे थे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुंदन पर पहला केस तब दर्ज हुआ था, जब उसकी उम्र महज करीब 14 साल थी। पुलिस के अनुसार, वह कम उम्र के लड़कों को अपने गैंग में शामिल कर रहा था और इलाके में अपना आपराधिक नेटवर्क तेजी से फैलाने की कोशिश में था। मुठभेड़ में मारा गया दूसरा अपराधी प्रियांशु दुबे भी कम उम्र का था। वह सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहता था और अक्सर रील्स बनाता था। पुलिस के मुताबिक, वह कुंदन ठाकुर के साथ मिलकर आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। बताया जा रहा है कि प्रियांशु अपने रील्स में हथियार चलाने की प्रैक्टिस करते हुए भी नजर आता था। वह आपराधिक थीम वाले वॉइसओवर पर लिपसिंक कर वीडियो बनाता था, जो सोशल मीडिया पर शेयर किए जाते थे। अब जानिए कैसे शुरू हुआ अपराधियों के खिलाफ ऑपरेशन पूरी घटना की शुरुआत एक धमकी भरे फोन कॉल से हुई थी। कुंदन ने नेपाल के नंबर से चकिया थाने के एडिशनल SHO गौरव कुमार को फोन कर चुनौती दी थी। कुंदन ने कहा था, अगली खबर होगी कि 10-15 पुलिसकर्मी मारे गए… गुंडई क्या होती है, दिखा देंगे। मुठभेड़ से एक दिन पहले अपराधी कुंदन ने चकिया के एडिशनल SHO गौरव कुमार को फोन कर धमकाया था। दोनों की बातचीत का करीब साढ़े 4 मिनट का ऑडियो सामने आया है। नीचे पूरी बातचीत पढ़िए… कुंदन ठाकुरः प्रणाम सर, मैं कुंदन बोल रहा हू। ये क्या चल रहा है सर? SHO: क्या.. SP सर बुला रहे हैं। कुंदन ठाकुरः मुझे और मेरे परिवार वालों को क्यों तंग किया जा रहा है? न्यूज में पढ़े कि अपराधी और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई है। इस मुठभेड़ में एक अपराधी घायल हो गया है। कुंदन ठाकुरः क्या सर(एसपी) का घर-परिवार नहीं है क्या? कुंदन ठाकुरः आप लोग जो जानकारी दे रहे हैं, वह अभी चल रही है। लेकिन पता है अगली न्यूज क्या होगी? SHO: क्या होगी? कुंदन ठाकुरः अपराधी-पुलिस के बीच मुठभेड़ में 10-15 पुलिसकर्मी मारे गए और अपराधी फरार। गुंडई क्या होती है, वो पूरे शहर को दिखा देंगे। आपलोगों समझ नहीं आ रहा है न…मेरे घर पर 70-80 पुलिसकर्मी जो रेड मार रहे हैं, हार्डडिस्क ले जा रहे हैं। ये सारे खर्च कौन देखेगा। 10-15 हजार का हार्डडिस्क कौन बार-बार लगाएगा। हम लोग कहां से मेंटेंन करेंगे। कुंदन ठाकुरः जब हमने कहा कि हम लोगों की तरफ से आपलोगों को कोई दिक्कत नहीं होगी, तो फिर आपलोग बिना वजह उंगली क्यों कर रहे हैं। मोतिहारी में जो पुलिस पर गोली चलने वाली खबर जो चल रही है, वो कहां से चल रही है। SHO: मैं नहीं जानता हूं। कुंदन ठाकुरः हमारी-पुलिस के बीच मुठभेड़ होगी, तो मैं लड़ने वालों में से हूं। भागने वाला नहीं हूं। 47-56 गोली-बंदूक चलाने हमको भी आता है। एक काम कीजिए, हम आपको आधे घंटे का समय देते हैं। चकिया में एक घर का लोकेशन देते हैं। अगर हिम्मत है तो मुझे जिंदा पकड़कर दिखाइए। बोलिए आएं हम चकिया… SHO: तुम चकिया में नहीं हो क्या? कुंदन ठाकुरः नहीं हम पटना में बैठे हैं, लेकिन आपके बोलने पर चकिया आते हैं। लेकिन इस बार वाले मुठभेड़ में पुलिसकर्मी मरेगा हम नहीं मरेंगे। ये बात याद रखिएगा। ये न्यूज बहुत जल्दी आएगा। हम बहुत ज्यादा दूर नहीं हैं, आसपास ही हैं और हमेशा तैयार हैं। सर को बोल दीजिए कि कुंदन हमेशा तैयार रहता है। कुंदन को गोली चलाना सीखना नहीं है। वह पहले से जानता है, दोनों हाथों से चला सकता है। SHO: धमकी दे रहे हो… कुंदन ठाकुरः हम आपको धमकी नहीं, एडवाइस दे रहे हैं। मेरे घर-परिवार वालों को परेशान मत कीजिए। मेरी मां से आप लोग तुम-ताम कर के जाइएगा, तो नतीजा यही होगा। SHO: हमको एडवाइस की जरूरत नहीं है। कुंदन ठाकुरः ठीक है सर, आपलोग तैयार रहिएगा। हम तैयार हैं।

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