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अररिया में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रेणु महोत्सव का आयोजन किया गया। शहर के टाउन हॉल में रात करीब 8 बजे साहित्य परिचर्चा और कवि सम्मेलन शुरू हुआ, जो देर रात तक चला। हालांकि, कार्यक्रम की शुरुआत सभागार में खाली कुर्सियों के बीच हुई, जिससे आयोजकों को निराशा हुई। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य महान आंचलिक साहित्यकार फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ की साहित्यिक विरासत को याद करना और नई पीढ़ी को उनके विचारों से परिचित कराना है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें साहित्य और संस्कृति से जुड़े कई स्थानीय रचनाकारों ने भाग लिया। साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने पर दिया जोर परिचर्चा के दौरान वक्ताओं और कवियों ने रेणु जी के साहित्य, उनकी सामाजिक दृष्टि और ग्रामीण जीवन के यथार्थ चित्रण पर अपने विचार साझा किए। विभिन्न साहित्यिक प्रस्तुतियों और विचार-विमर्श के माध्यम से उनकी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। कवि सम्मेलन में देश के जाने-माने कवि दिनेश बावर, अमरदीप कुमार और डॉ. तिष्य श्री सहित कई स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया और पूरे सभागार में एक साहित्यिक माहौल बना रहा। रेणु जी ने विश्व स्तर पर जिले का नाम किया रोशन कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सान्याल कुमार ने बताया कि यह रेणु महोत्सव महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु की जयंती पर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रेणु जी ने विश्व स्तर पर अररिया का नाम रोशन किया है, और यह कार्यक्रम उन्हीं को समर्पित एक श्रद्धांजलि है, जिसका उद्देश्य उनकी साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना है।
अररिया रेणु महोत्सव में खाली रहीं कुर्सियां:साहित्य परिचर्चा-कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन, कवियों ने साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने पर दिया जोर
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