झारखंड के विश्वविद्यालयों में 17 साल पहले नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसरों का मामला अब एक ऐसी प्रशासनिक कहानी बन गया है, जहां नियमों से ज्यादा फाइलों की किस्मत तय कर रही है कि किसे हक मिलेगा और किसे नहीं। वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षकों को नियमानुसार 13 साल पहले प्रमोशन मिल जाना चाहिए था। लेकिन 4 माह पहले जब विभिन्न विवि के लगभग 500 असिस्टेंट प्रोफेसर को स्टेज-2 में प्रोन्नति मिली तो लगा कि अब वर्षों से लंबित आर्थिक लाभ मिलने लगेगा। लेकिन यह राहत अभी भी अधूरी है। क्योंकि रांची विवि द्वारा अभी तक 36 शिक्षकों के वेतन निर्धारण प्रस्ताव जब उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में भेजा गया है, जिसमें से सिर्फ 3 शिक्षकों को ही मंजूरी दी गई है। वहीं 30 प्रस्तावों को दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर रांची विवि को लौटा दिए गए हैं। कई शिक्षकों का कहना है कि जिन 3 की फाइलें पास हुईं, उनकी योग्यता बाकी शिक्षकों से अलग नहीं थी। प्रस्ताव वापस होने की 3 मुख्य वजह 1. पीएचडी इंक्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज नहीं : अधिकांश प्रस्तावों में पीएचडी इंक्रीमेंट निर्धारण का पूरा रिकॉर्ड नहीं था। अब वांछित डॉक्युमेंट के साथ दुबारा प्रस्ताव भेजा जाएगा। 2. प्रमोशन नोटिफिकेशन संलग्न नहीं : जेपीएससी द्वारा स्टेज-2 में प्रमोशन देने के बाद विश्वविद्यालय को लिस्ट भेजी गई थी। इसके आधार पर संबंधित विवि द्वारा नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इस नोटिफिकेशन को वेतन निर्धारण प्रस्ताव के साथ जमा करना था। 3. पिछला वेतन निर्धारण का डॉक्युमेंट : स्टेज-2 में वेतन निर्धारण के लिए पिछला वेतन निर्धारण का दस्तावेज जमा करना जरुरी है। लेकिन कई शिक्षकों ने जमा नहीं किया है। किस-किस स्तर पर प्रस्ताव लंबित है असिस्टेंट प्रोफेसर का वेतन निर्धारण प्रस्ताव विभिन्न स्तर पर लंबित है। प्रथम चरण में पीजी विभाग या कॉलेज से एचओडी या प्रिंसिपल अनुमोदन कर प्रस्ताव आगे बढ़ाते हैं। अभी भी कुछ विभागों में प्रस्ताव लंबित है। इसके बाद यूनिवर्सिटी मुख्यालय में प्रस्ताव भेजा जाता है, यहां भी दर्जनों प्रस्ताव लंबित है। इसके बाद विवि द्वारा शिक्षा विभाग में प्रस्ताव भेजा जाता है, यहां भी लंबित है। 90 फीसदी प्रस्ताव इसलिए वापस मिली जानकारी के अनुसार स्टेज-2 का वेतन निर्धारण प्रस्तावों में लगभग 90% मामलों में पीएचडी इंक्रीमेंट से जुड़े दस्तावेज नहीं होने के कारण प्रस्ताव लौटे। बताते चलें कि नियुक्ति के समय जिन शिक्षकों के पास पीएचडी की डिग्री थी, उन्हें 5 इंक्रीमेंट का लाभ मिल रहा है। वहीं जिन्होंने नियुक्ति के 4 साल के भीतर पीएचडी हासिल की थी, उन्हें 3 इंक्रीमेंट मिल रहा है। 4 साल बाद वाले को कोई लाभ नहीं। क्या कहते हैं प्रभावित शिक्षक: शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जिन 3 मामलों में मंजूरी मिली, क्या उनकी फाइलें पूरी थीं? अगर नहीं, तो उन्हें प्राथमिकता कैसे मिली? आरोप है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और चयनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। क्या है पूरा मामला… जेपीएससी के जरिए असिस्टेंट प्रोफेसर को स्टेज-1 से स्टेज-2 में चार महीने पहले प्रमोशन मिला था। इसके बाद राज्य के संबंधित विश्वविद्यालयों द्वार वेतन निर्धारण कर मंजूरी के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें रांची यूनिवर्सिटी के 36 प्रस्तावों में से 30 को डॉक्युमेंट की कमी बताते हुए वापस कर दिया गया। आरयू में अब तक सिर्फ तीन शिक्षकों को वेतन निर्धारण का प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

