![]()
एम्स पटना ने अपनी पहली बैरियाट्रिक (वजन घटाने की) सर्जरी सफलतापूर्वक करके बिहार में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक नया इतिहास रचा है। अब गंभीर मोटापे से जूझ रहे मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों या दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। संस्थान ने 24 वर्षीय एक महिला की सफल बैरियाट्रिक सर्जरी की, जिनका वजन 110 किलोग्राम से अधिक और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 42 से ऊपर था। मरीज लंबे समय से पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज), हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याओं से पीड़ित थीं। डॉक्टरों के अनुसार, सर्जरी के बाद उनके वजन में नियंत्रित कमी आएगी, हार्मोन संतुलन सुधरेगा और भविष्य में मातृत्व की संभावना भी बढ़ेगी। विशेषज्ञ बताते हैं कि मोटापा केवल शरीर में चर्बी बढ़ने तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों की जड़ बन सकता है। इसमें टाइप-2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, फैटी लिवर, जोड़ों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, स्लीप एपनिया और अवसाद शामिल हैं। मेटाबॉलिज्म में बदलाव संभव समय रहते वैज्ञानिक उपचार आवश्यक है। बैरियाट्रिक सर्जरी एक प्रमाणित और प्रभावी उपचार है। यह न केवल वजन कम करता है, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म में भी सकारात्मक बदलाव लाता है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल बेहतर होता है, रक्तचाप संतुलित रहता है, दवाइयों पर निर्भरता कम होती है और महिलाओं में पीसीओडी और प्रजनन संबंधी समस्याओं में भी सुधार होता है। सर्जरी प्रो. डॉ. उत्पल आनंद, डॉ. बसंत और डॉ. कुणाल की टीम ने डॉ. निरुपम सिन्हा के मार्गदर्शन में हुई। गंभीर मोटापे के मरीजों में एनेस्थीसिया प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है। एनेस्थीसियोलॉजी और क्रिटिकल केयर विभाग की टीम ने डॉ. नीरज कुमार के नेतृत्व में सर्जरी को सुरक्षित रूप से संपन्न कराया। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. उमेश भदानी ने इसे एक सामूहिक सफलता बताया।
मनोवैज्ञानिक सहयोग भी मिलेगा
कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिग.) डॉ. राजू अग्रवाल ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि बिहार में उन्नत, सुरक्षित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
भविष्य में मरीजों को सर्जरी से पहले काउंसलिंग, पोषण विशेषज्ञ की सलाह, मनोवैज्ञानिक सहयोग और नियमित फॉलो-अप जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।




