
सिमडेगा. केरसई प्रखंड के किनकेल गांव में आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व सरहुल बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने सरहुल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमें धरती, जल, जंगल और समस्त जीव-जंतुओं के प्रति कृतज्ञ रहने की प्रेरणा देता है. साथ ही यह प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन यापन करने का संदेश भी देता है. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, जंगलों की रक्षा तथा आपसी भाईचारे को सुदृढ़ करने का सामूहिक संकल्प लिया. झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन जनसंगठन के केरसई प्रखंड प्रभारी अनूप लकड़ा, खुशीराम कुमार, थाना प्रभारी विनायक पांडे, नागेश्वर प्रसाद, सुनील मिंज, एएसआई जितेंद्र सिंह, लंकेश्वर प्रधान, अलफोंस डुंगडुंग, अजीत लकड़ा, जुवेल कुजूर, विदुरनाथ मांझी, रजत टेटे, बिपिन डुंगडुंग, अमित कुजूर, बिरसा बड़ाईक, बलभद्र दिवान मांझी, सुपत मिंज, रमेश मांझी, गुलेंद्र मांझी एवं रामेश्वर मांझी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया.
इस मौके पर भव्य जुलूस निकाला गया और पारंपरिक नृत्य-गीत का आयोजन किया गया. ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभायी. सरहुल पर्व ने एक बार फिर यह साबित किया कि आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और सामूहिकता की भावना को जीवित रखती है.The post किनकेल में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया सरहुल पर्व appeared first on Prabhat Khabar.




