कृष्ण प्रेम में रंगा हुआ और वाणी अलौकिक होती है संत की : स्वामी

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रामगढ़| वृंदावन में प्रेम मंदिर की स्थापना करने वाले जगद्गुरु श्री कृपालु श्री महाराज के वरिष्ठ प्रचारक डॉ स्वामी युगल शरण जी की आध्यात्मिक संस्था ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से प्रवचन कार्यक्रम कराया जा रहा है। छावनी फुटबॉल मैदान में प्रवचन श्रृंखला चल रही है। बुधवार की शाम को डॉ स्वामी युगल शरण ने प्रवचन में कहा कि वास्तविक संत को पहचानने के लिए शास्त्रों में अनेक सावधानी बताई गई है। संत के विशेष लक्षण होते है, जिनके आधार पर चतुर और विवेकशील जीवात्मा उन्हें पहचान सकता है और वास्तविक संत की शरणागति कर सकता है। भगवान कहते है कि उनकी प्राप्ति के लिए उनके भक्त, अर्थात् वास्तविक संत की शरणागति करनी होगी।महापुरुष की पहचान श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ जिसका शास्त्रों का सम्यक् ज्ञान हो। केवल शाब्दिक नहीं, बल्कि अनुभवात्मक ज्ञान हो। जिसने स्वयं भगवान को जाना, देखा और तद्रूप हो गया हो। जो जीवात्मा परमात्मा को जान लेता है, वह स्वयं भी उन्हीं के समान हो जाता है। महापुरुष की पहचान में सावधानी में वास्तविक महापुरुष हमें संसार में नहीं उलझाते, वे सिद्धियों का चमत्कार नहीं दिखाते,तीन प्रकार की सिद्धियां तामसिक, राजसिक और सात्त्विक होती है,संतों के पास दिव्य शक्तियां जो उन्हें भगवत्प्राप्ति के बाद प्राप्त होती है।

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