
Koderma Rare Minerals, कोडरमा (विकास कुमार): कोडरमा जिला और इसके आसपास के इलाकों में दुर्लभ खनिजों की खोज को लेकर केंद्र सरकार ने ठोस पहल शुरू कर दी है. परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन परमाणु खनिज निदेशालय द्वारा यहां जी-4 स्तर का भूगर्भीय और रेडियोमैट्रिक सर्वे कराया जा रहा है. इस सर्वे के माध्यम से रेयर अर्थ मिनरल्स समेत अन्य महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की संभावनाओं का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है.
राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- रेयर अर्थ मिनरल्स का महत्व बढ़ा
इस संबंध में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स का महत्व लगातार बढ़ रहा है और पिछले 10–11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार इस क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दी गयी है.
कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने जताई खुशी
इधर, कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में हो रहे इस सर्वेक्षण को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री सह कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी ने खुशी जताई है. उन्होंने बयान जारी कर कहा कि कोडरमा में दुर्लभ एवं रणनीतिक खनिजों की संभावनाओं को लेकर बड़े पैमाने पर भूगर्भीय सर्वे का आरंभ होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण और उत्साहजनक कदम है.
वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ मिनरल्स की बढ़ रही मांग
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में रेयर अर्थ मिनरल्स इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों के लिए अत्यंत आवश्यक हो चुके हैं. यदि सर्वे में इन खनिजों की उपस्थिति प्रमाणित होती है, तो यह न केवल कोडरमा बल्कि पूरे देश के औद्योगिक और रणनीतिक विकास के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि साबित होगी.
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खनिज संपदा से उद्योग और निवेश के खुलेंगे नये द्वार: अन्नपूर्णा देवी
अन्नपूर्णा देवी ने आगे कहा कि इससे क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना, निवेश और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो सकते हैं, जिससे कोडरमा के समग्र विकास को नई गति मिलेगी. आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में कोडरमा की संभावित खनिज संपदा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण-संतुलित प्रक्रिया के तहत इस प्राकृतिक संपदा का उपयोग किया जाएगा और स्थानीय समुदायों के हितों की पूरी रक्षा होगी.
अभ्रक नगरी रही है कोडरमा की पहचान
गौरतलब है कि कोडरमा की पहचान लंबे समय तक अभ्रक नगरी के रूप में रही है. विश्व प्रसिद्ध रूबी माइका सिर्फ कोडरमा क्षेत्र में पाया जाता था. हालांकि, नए वन संरक्षण अधिनियम और कठोर नियम-कानून लागू होने के बाद पिछले कई वर्षों से यहां एक भी अभ्रक खदान वैध रूप से संचालित नहीं हो रही है. कुछ क्षेत्रों में आज भी अभ्रक के अंश ढिबरा का अवैध कारोबार होने की बातें सामने आती रहती हैं. इसके अलावा कोडरमा की धरती में विभिन्न प्रकार के पत्थर प्रचुर मात्रा में है.
ब्लैक स्टोन का कारोबार वैध, अन्य पत्थरों पर उठते रहे हैं सवाल
वर्तमान में ब्लैक स्टोन का कारोबार नियमानुसार संचालित हो रहा है, जबकि ब्लू स्टोन, सफेद पत्थर (फेल्सपार, क्वार्ट्ज) और ग्रीन स्टोन जैसे कीमती पत्थरों के अवैध खनन की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रही हैं. प्रशासनिक छापेमारी में इन पत्थरों की बरामदगी भी हो चुकी है. वहीं, बीते वर्ष कोडरमा में लिथियम के अंश पाए जाने की चर्चा भी हुई थी, हालांकि इसकी अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. दुर्लभ खनिजों की यह नई खोज कोडरमा के लिए एक बार फिर खनिज मानचित्र पर उभरने का संकेत मानी जा रही है.
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