अमेरिका और इस्राइल ने ईरान के खिलाफ एक नया और बेहद आक्रामक साझा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। ईरान की राजधानी तेहरान में कई धमाके सुने गए हैं और इस हमले का सीधा मकसद ईरान के शीर्ष नेतृत्व खत्म करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों की पुष्टि करते हुए खुलेआम ईरानी नागरिकों से अपनी ही सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील कर दी है। इस पूरी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के नए संकट के केंद्र में सिर्फ एक ही नाम है- ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई। आइए आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि 86 वर्षीय खामेनेई कौन हैं और वे पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी क्यों बने हुए हैं।
ताजा अमेरिका-इस्राइल हमले का खामेनेई से क्या सीधा कनेक्शन है?
ईरान पर हुए इस ताजा हमले में देश भर के कई इलाकों के साथ-साथ राजधानी तेहरान के उन विशिष्ट क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है, जो सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई से जुड़े हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सात मिसाइलें तेहरान के उत्तर में स्थित राष्ट्रपति भवन और खामेनेई के कार्यालयों (कंपाउंड) के पास गिरी हैं। अमेरिका और इस्राइल की इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य इस्लामी गणराज्य के नेतृत्व को निशाने पर लेना है। हालांकि, हमलों के दौरान खामेनेई तेहरान में मौजूद नहीं थे और उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था।
आखिर कौन हैं अयातुल्ला अली खामेनेई?
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई एक धर्मगुरु हैं, जो 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर (सर्वोच्च नेता) के पद पर काबिज हैं। उन्होंने ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद यह पद संभाला था। खुमैनी ने ही 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया था, जिसमें अमेरिका समर्थित शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया गया था। आज की तारीख में खामेनेई देश के आध्यात्मिक नेता होने के साथ-साथ सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम और सर्वोच्च शक्ति अपने पास रखते हैं।

खामेनेई अमेरिका और इस्राइल के लिए सबसे बड़े ‘विलेन’ क्यों बन गए हैं?
अपने शासनकाल के दौरान खामेनेई ने हमेशा पश्चिमी देशों के साथ एक शत्रुतापूर्ण संबंध बनाए रखा है और वे अमेरिका को ईरान का नंबर एक दुश्मन मानते हैं, जिसके ठीक पीछे वे इस्राइल को रखते हैं। उनकी असीमित ताकत का मुख्य आधार ईरान की शक्तिशाली ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) और ‘बसीज’ अर्धसैनिक बल हैं, जिनकी वफादारी सीधे तौर पर खामेनेई के प्रति है।
इस दुश्मनी की सबसे बड़ी वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। यद्यपि खामेनेई का दावा है कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है और वे कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन अमेरिका और इस्राइल लगातार यह आरोप लगाते हैं कि ईरान छिपकर परमाणु बम विकसित कर रहा है।
ट्रंप और इस्राइली नेतृत्व ने खामेनेई को लेकर क्या सख्त रुख अपनाया है?
अमेरिका और इस्राइल के शीर्ष अधिकारी अब खुलेआम खामेनेई को सत्ता से हटाने और खत्म करने की धमकियां दे रहे हैं। इस्राइल के रक्षा मंत्री इस्राइल काट्ज ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस्राइल को नष्ट करने का लक्ष्य रखने वाला खामेनेई जैसा तानाशाह ‘अस्तित्व में नहीं रह सकता’। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी उनकी हत्या के प्रयास की संभावना से इनकार नहीं किया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि वे ठीक-ठीक जानते हैं कि ‘तथाकथित सुप्रीम लीडर’ कहां छिपे हैं और वे अमेरिका के लिए एक ‘आसान लक्ष्य’ हैं। ट्रंप ने ईरानी जनता से सीधे तौर पर शासन परिवर्तन की अपील करते हुए कहा है, “जब हम अपना काम पूरा कर लें, तो अपनी सरकार पर कब्जा कर लेना…पीढ़ियों के लिए शायद यह आपका इकलौता मौका होगा”।
खामेनेई और पश्चिमी देशों के बीच यह तनातनी अब एक निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। जहां एक ओर खामेनेई कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और घरेलू विरोध के बावजूद सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं, वहीं अमेरिका और इस्राइल अब उनके नेतृत्व को जड़ से उखाड़ने के लिए सीधी सैन्य कार्रवाई पर उतर आए हैं। इस संघर्ष का परिणाम पूरे मध्य पूर्व की भू-राजनीति की दशा और दिशा तय करेगा।




