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खाड़ी देशों में जारी संघर्ष का असर अब झारखंड के विभिन्न जिलों में भी दिखने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण पिछले दो-तीन दिनों से देश में एलपीजी सिलेंडरों की कमी महसूस की जा रही है। झारखंड के लगभग सभी जिलों में उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर की अनुपलब्धता से परेशान हैं। कोडरमा में एलपीजी सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। वार्ड संख्या 9 स्थित गणेश पूजा मैदान में पिछले लगभग तीन दिनों से बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर लेने के लिए जमा हो रहे हैं। गुरुवार सुबह से ही सैकड़ों उपभोक्ता मैदान में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। दो-तीन दिनों से लगातार एलपीजी सिलेंडर लेने आ रहे
करमा निवासी पवन साव ने बताया कि वह पिछले दो-तीन दिनों से लगातार एलपीजी सिलेंडर लेने आ रहे हैं। उन्हें हर दिन यह कहकर लौटा दिया जाता है कि अगले दिन सिलेंडर उपलब्ध करा दिया जाएगा। उपभोक्ता विनोद मोदी ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि घर में लगातार दिक्कतें आ रही हैं। पहले पड़ोसी अतिरिक्त सिलेंडर आपस में साझा कर लेते थे, लेकिन एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें फैलने के बाद से लोग सिलेंडर देने से साफ इनकार कर रहे हैं। त्योहार फीका पड़ रहा है
सफीदा खातून ने बताया कि ईद का पवित्र महीना चल रहा है। रमजान के दौरान हर दिन शाम को इफ्तार और सुबह सेहरी के लिए पकवान बनाए जाते हैं। एलपीजी सिलेंडर की समस्या के कारण उनका यह त्योहार फीका पड़ रहा है। उन्हें लकड़ी या कोयले के चूल्हे पर खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सिलेंडर लेने की होड़ को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि एलपीजी के चक्कर में कहीं भगदड़ जैसी स्थिति न उत्पन्न हो जाए। एलपीजी सिलिंडर विक्रेता ऊंचे से दीवार पर जा बैठे हैं ताकि कंज्यूमर से उनकी कोई झड़प न हो जाए। वहीं, कंज्यूमर इस इंतजार में हैं कि कब उनका नंबर आए और उन्हें सिलिंडर उपलब्ध हो सके। इधर, इस पूरे मामले पर गैस एजेंसी के संचालक कुछ भी कहने से बच रहे हैं और कंज्यूमर को एलपीजी सिलिंडर के कम स्टॉक का हवाला देकर अगले दिन आने की गुजारिश कर रहे हैं। इंडक्शन चूल्हा की डिमांड बढ़ने लगी
वहीं, इन सब के बीच बाजार में इंडक्शन चूल्हा (बिजली से संचालित होने वाला चूल्हा) की डिमांड बढ़ने लगी है। लोग बर्तन दुकान में जाकर इंडक्शन चूल्हा की खरीद बिक्री कर रहे हैं। बर्तन विक्रेता गौरांग पुजारा ने बताया कि जब से देश भर में एलपीजी सिलेंडर के किल्लत की खबरें फैली है, तब से हमारे यहां इंडक्शन चूल्हा की मांग बढ़ने लगी है। लोग हमारे दुकान पर आकर इंडक्शन चूल्हा की खरीदारी कर रहे हैं। गिरिडीह में गैस सिलेंडर के लिए अफरातफरी इधर, गिरिडीह में भी घरेलू गैस की कमी होने की बात से लोगों के बीच घबराहट का माहौल देखने को मिल रहा है। शहर की विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर सैकड़ों लोगों की लंबी कतार लग गई है। बुधवार से शुरू हुआ यह सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहा। गुरुवार की सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के बाहर लाइन में खड़े नजर आए। स्थिति यह रही कि कई जगहों पर भीड़ काफी बढ़ गई, जिसके बाद व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। पुलिस कर्मियों ने लोगों को लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने की अपील की, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। इस संबंध में उपभोक्ता गुड्डू यादव ने बताया कि वे सुबह ब्रश करने और काम-काज निपटाने के बाद करीब 8 बजे से लाइन में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे बुधवार को भी करीब 4 बजे एजेंसी पहुंचे थे, लेकिन उस समय बताया गया कि गैस अगले दिन सुबह आएगा और तब मिल जाएगा। इसके बाद गुरुवार सुबह से ही वे फिर लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया है। अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील वहीं, अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए धनबाद में लोग पहले से ही गैस लेने एजेंसियों तक पहुंच रहे हैं। हालांकि कुछ एजेंसियों में सर्वर की समस्या के कारण उपभोक्ताओं को थोड़ी परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि फिलहाल जिले में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है। उपभोक्ता बुकिंग करते हैं तो गैस सिलेंडर उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। संचालकों ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के अनुसार ही गैस बुक करें, ताकि सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिल सके। रेस्टोरेंट संचालक मेन्यू घटाने पर मजबूर
धनबाद में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई को लेकर कुछ परेशानी सामने आ रही है। शहर के कई रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उन्हें जरूरत के मुताबिक कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। धनबाद के न्यू मुंबई स्वीट्स के मैनेजर ने बताया कि गैस की पर्याप्त सप्लाई नहीं होने के कारण फिलहाल नॉर्थ इंडियन खाने की सर्विस बंद करनी पड़ी है।
खाड़ी युद्ध का असर, झारखंड में एलपीजी की किल्लत:उपभोक्ता परेशान, 3-4 दिनों से खाली हाथ लौटने को मजबूर; एजेंसी के बाहर लंबी कतार
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