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नवादा में बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) का आंदोलन तेज हो गया है। संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल (सामूहिक अवकाश) पर जाने की घोषणा की है। इस हड़ताल से राज्य भर में राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में थाना रोड स्थित धरना स्थल पर कर्मचारी एक दिवसीय धरना दे रहे हैं। यह धरना राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। पिछले साल भी संघ ने अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखी थीं, लेकिन उन पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई थी। सप्ताह में एक दिन भी छुट्टी नहीं मिलती कर्मचारियों का मुख्य शिकवा है कि उन्हें सप्ताह में एक दिन की भी छुट्टी नहीं मिलती। त्योहारों या पर्वों पर भी कोई अवकाश नहीं दिया जाता, जिससे उनके परिवारजन चिंतित रहते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे खुद को बंधुआ मजदूर की तरह महसूस करते हैं, क्योंकि कई महीनों या साल भर बाद ही घर जा पाते हैं। संघ ने सरकार को 17 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन सौंपा है। इनमें प्रमुख रूप से ग्रेड पे में वृद्धि, गृह जिले में पदस्थापन, पदोन्नति, संसाधनों की उपलब्धता और छुट्टियों का प्रावधान शामिल हैं। दाखिल-खारिज, परिमार्जन और राजस्व कार्य ठप इस आंदोलन के कारण दाखिल-खारिज, परिमार्जन, म्यूटेशन और भूमि मापी जैसे महत्वपूर्ण राजस्व कार्य ठप हो गए हैं। नवादा सहित राज्य के कई जिलों में धरना-प्रदर्शन जारी हैं, जिससे सरकारी कामकाज पर असर पड़ रहा है। संघ के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हड़ताल जारी रहेगी और आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सरकार के साथ वार्ता हुई है, लेकिन लिखित आदेश न मिलने और ‘नो वर्क नो पे’ की शर्त से कर्मचारी असंतुष्ट हैं। संघ ने 27 फरवरी को विधानसभा महाघेराव का भी ऐलान किया था। कर्मचारी दृढ़ हैं कि बिना ठोस फैसले के आंदोलन वापस नहीं लेंगे।
'खुद को बंधुआ मजदूर की तरह महसूस करते':बिहार भूमि सुधार कर्मचारी संघ का आंदोलन तेज,अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा
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