गिरिडीह में दो दिनों से हेलीकॉप्टर का मूवमेंट:हेलीपैड सर्वे और लीथियम जांच से बढ़ी जिज्ञासा, स्थानीय लोगों में कौतूहल

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गिरिडीह जिले के आसमान में पिछले दो दिनों से लगातार हेलिकॉप्टर की उड़ान ने लोगों का ध्यान खींच लिया है। शनिवार को दिनभर कई राउंड लगाने के बाद रविवार सुबह करीब 10 बजे से फिर हेलिकॉप्टर को शहर से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों और कई प्रखंडों के ऊपर चक्कर लगाते देखा गया। लगातार हो रही इस गतिविधि से आम लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ असमंजस की स्थिति बन गई। शहर के विभिन्न हिस्सों में लोग यह जानने को लेकर चर्चा करते रहे कि आखिर हेलिकॉप्टर बार-बार क्यों उड़ान भर रहा है। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। जीपीएस-जीएनएसएस तकनीक से हो रहा एयर सर्वे जांच-पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हुआ कि हेलिकॉप्टर के माध्यम से जिले में जीपीएस-जीएनएसएस आधारित एयर सर्वे कराया जा रहा है। यह सर्वे उन स्थानों का किया जा रहा है जहां पिछले पांच वर्षों में हेलीपैड का निर्माण हुआ है या भविष्य में आपात स्थिति, सरकारी कार्यक्रमों और वीआईपी आगमन के लिए हेलीपैड बनाए जाने की संभावना है। हेलिकॉप्टर में अत्याधुनिक जीपीएस-जीएनएसएस रिसीवर, एलआईडीएआर और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से सेंटीमीटर स्तर की सटीकता वाला डेटा एकत्र किया जा रहा है। इस डेटा को बाद में जीआईएस सॉफ्टवेयर के जरिए मैप में परिवर्तित किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक से ऐसे क्षेत्रों का भी सर्वे संभव है जहां सामान्य रूप से पहुंच पाना कठिन होता है। तिसरी-गावां में लीथियम की तलाश तेज इधर, जिले के तिसरी-गावां क्षेत्र में संभावित लीथियम भंडार की जांच भी तेज हो गई है। अभ्रक पट्टी क्षेत्र में लीथियम मिलने की संभावना को देखते हुए भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की टीम यहां विस्तृत सर्वेक्षण कर रही है। रविवार को भी विशेषज्ञों की टीम आधुनिक उपकरणों के साथ जांच में जुटी रही। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हेलिकॉप्टर से हो रहे एयर सर्वे का लीथियम जांच से कोई सीधा संबंध नहीं है। दोनों कार्य अलग-अलग एजेंसियों द्वारा स्वतंत्र रूप से संचालित किए जा रहे हैं। डीसी ने दूर की भ्रांतियां, अलग-अलग प्रक्रियाएं जारी जिलाधिकारी रामनिवास यादव ने बताया कि जिले में हेलीपैड से जुड़े एयर सर्वे के तहत हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहा है, जबकि लीथियम की जांच के लिए भू-वैज्ञानिकों की टीम जमीन स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों गतिविधियों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई थी। जिसे अब स्पष्ट कर दिया गया है। जिले में चल रही इन दोनों प्रक्रियाओं ने आम लोगों की जिज्ञासा जरूर बढ़ा दी है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि यह सभी कार्य विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।

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