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चाईबासा स्थित सारंडा के लगभग 10 गांवों के ग्रामीणों ने सोमवार सुबह 6 बजे से गुवा स्थित राजाबुरु खदान को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि खदान का संचालन ग्राम सभा की अनुमति, मानकी-मुंडाओं की सहमति और स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिए बिना शुरू किया गया था। यह आंदोलन सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुईया के तत्वावधान में किया जा रहा है। सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम ने आंदोलन की अध्यक्षता की, जबकि गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल भी इसमें शामिल रहे। बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता दी जा रही मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि जब तक खदान में 75 प्रतिशत रोजगार स्थानीय प्रभावित गांवों के युवाओं को नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि खदान संचालन में स्थानीय लोगों की उपेक्षा की जा रही है और बाहरी मजदूरों को प्राथमिकता दी जा रही है। ग्रामीण खदान परिसर के पास पेड़ों के नीचे डेरा डाले हुए हैं। आंदोलनकारी वहीं भोजन बना रहे हैं और रात में भी रुककर विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बना रहे हैं। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी गुवा सेल प्रबंधन की होगी। स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा ग्रामीणों का आरोप है कि खदान का संचालन ठेका कंपनी मां सरला पावर वर्क द्वारा किया जा रहा है और अधिकांश मजदूर बाहर से लाए गए हैं। उनके अनुसार, स्थानीय युवाओं को न तो स्थायी रोजगार मिल रहा है और न ही उचित मजदूरी दी जा रही है। आंदोलनकारियों ने पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा कानून) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना खनन कार्य असंवैधानिक है और यह आदिवासी क्षेत्रों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और प्रबंधन से जल्द बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालने की मांग की है।
गुवा सेल की राजाबुरु खदान अनिश्चितकालीन बंद:रोजगार की मांग पर ग्रामीणों का प्रदर्शन, कहा-स्थानीय लोगों की उपेक्षा की जा रही
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