गोपालगंज में पुलिस सप्ताह की शुरुआत:छात्रों को बताया- 18 साल से कम उम्र में ‘सहमति’ मान्य नहीं, साइबर और पोक्सो कानून पर दी जानकारी

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गोपालगंज में बिहार पुलिस सप्ताह कार्यक्रम का आगाज हो गया है। जिला समाहरणालय सभागार में दीप प्रज्वलित कर इसकी शुरुआत की गई। इस अवसर पर आयोजित विशेष जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को “नाबालिग की सहमति कानूनन मान्य नहीं है” विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों को यौन शोषण, लैंगिक उत्पीड़न, ईव टीजिंग और बच्चों से संबंधित अपराधों के कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक किया गया। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को साइबर अपराधों और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराधों जैसे फर्जी प्रोफाइल बनाना, ऑनलाइन उत्पीड़न, आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना, साइबर बुलिंग और डिजिटल धोखाधड़ी के संबंध में भी विस्तार से बताया गया। मानसिक या ऑनलाइन शोषण एक गंभीर और दंडनीय अपराध
कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया कि नाबालिग के साथ किसी भी प्रकार का शारीरिक, मानसिक या ऑनलाइन शोषण एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। विद्यार्थियों को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और आपात स्थिति में पुलिस से संपर्क करने की प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। लाइन डीएसपी, मुख्यालय डीएसपी और साइबर डीएसपी ने “नाबालिग की सहमति” के गंभीर विषय पर चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की सहमति का कोई कानूनी मूल्य नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि पोक्सो एक्ट के तहत यदि किसी नाबालिग के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो ‘सहमति’ का तर्क बचाव का आधार नहीं बन सकता। यह जानकारी किशोरों को भावनात्मक जाल और गलत निर्णयों से बचाने के उद्देश्य से दी गई। किसी भी प्रकार का अनुचित स्पर्श या व्यवहार अपराध
अधिकारियों ने विद्यार्थियों को समाज में व्याप्त विभिन्न अपराधों के बारे में भी समझाया। उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार का अनुचित स्पर्श या व्यवहार अपराध की श्रेणी में आता है। छात्रों को स्कूल-कॉलेज के रास्तों पर होने वाली छेड़खानी के विरुद्ध आवाज उठाने और पुलिस की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी और निजी जानकारी साझा करने के खतरों के प्रति भी विद्यार्थियों को आगाह किया गया। इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपराधों के प्रति सचेत करना और उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराना था।

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