गोपालगंज रामाश्रय हत्याकांड में फैसला:ADJ कोर्ट ने दो दोषियों को उम्रकैद दी, 50-50 हजार जुर्माना लगाया, अब तक 6 को सजा

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गोपालगंज में जिले की व्यवहार न्यायालय के एडीजे-2 की कोर्ट ने बहुचर्चित उद्योगपति रामाश्रय सिंह हत्याकांड में गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-II) कुमार सुधांशु की अदालत ने दो अभियुक्तों राजू सिंह और विनय कुमार मिश्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस फैसले से करीब सात साल पुराने इस सनसनीखेज मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से सहायक लोक अभियोजक रामेश्वर सिंह तथा बचाव पक्ष से अधिवक्ता प्रभुनाथ सिंह, मोहनीश कुमार शाही और रूपेश तिवारी की दलीलों को सुनने के बाद पूर्व प्रमुख कलावती देवी के भतीजे राजू सिंह और पूर्व बीडीसी विनय कुमार मिश्र को दोषी पाया। यह मामला 13 जून 2019 का है, जब रामाश्रय सिंह की खजुरहा स्थित उनके निर्माणाधीन पेट्रोल पंप पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह दुबई के ठेकेदार थे। नौ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई
इस हत्याकांड के संबंध में रामाश्रय सिंह के बड़े भाई हरिनारायण सिंह ने नौ लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इनमें पूर्व प्रमुख कलावती देवी के भाई ब्रजकिशोर सिंह उर्फ बुच्ची सिंह, उनके दो भतीजे राजू सिंह और विवेक सिंह, पूर्व उप प्रमुख अरुण कुमार मिश्र उर्फ पप्पू मिश्र व उनके भतीजे संजय कुमार मिश्र उर्फ बब्लू मिश्र, अधिवक्ता राघवेन्द्र सिन्हा, सेवानिवृत्त शिक्षक प्रभुनाथ सिंह, पूर्व बीडीसी विनय कुमार मिश्र और बसदेवा गांव के अवधेश गोंड़ शामिल थे। इस मामले में कुल नौ नामजद आरोपियों में से अब तक छह लोगों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। इससे पहले, पूर्व प्रमुख कलावती देवी के भाई ब्रजकिशोर सिंह उर्फ बुची सिंह, उनके भतीजे विवेक सिंह, पूर्व उप प्रमुख अरुण कुमार मिश्र उर्फ पप्पू मिश्र और उनके भतीजे संजय कुमार मिश्र को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। केस में बहुत सारा तथ्य राजू सिंह के पक्ष में
वहीं, बसदेवा गांव के अवधेश गोंड और भोरे के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक प्रभुनाथ सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था। अधिवक्ता राघवेंद्र सिन्हा की सुनवाई के दौरान ही मृत्यु हो गई थी। उधर अभियुक्त राजू सिंह के अधिवक्ता मोहनीश कुमार शाही ने कहा कि केस में बहुत सारा तथ्य राजू सिंह के पक्ष में है। घटना के प्रथम जांच अधिकारी सुरेंद्र राय ने अपने साक्ष्य में कहा है कि जब वह घटना स्थल पर पहुंचे तो केस के सूचक या उनके परिवार का कोई भी मौजूद नहीं था। इसके साथ ही साथ अभियुक्त राजू सिंह सरकारी स्वास्थ्यकर्मी है जो घटना के दिन वो समय पर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिसई में ड्यूटी पर थे जिसकी पुष्टी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिसई की चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर अर्चना शुक्ला ने अपने साक्ष्य के दौरान कही है। प्राथमिकी भी 9 घंटा विलंब से दर्ज हुआ है।उन्होंने पटना उच्च न्यायालय में आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि राजू सिंह को निश्चित रूप न्याय मिलेगा।

इस फैसले का स्वागत करते हुए पीड़ित परिजनों ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन अपराधियों को उनके किए की सजा मिली है। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे कठोर फैसलों से जिले में अपराधियों के मनोबल पर प्रहार होगा और कानून के प्रति जनता का विश्वास और सुदृढ़ होगा। फिलहाल इस फैसले का स्वागत करते हुए पीड़ित परिजनों ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन अपराधियों को उनके किए की सजा मिली है। कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे कठोर फैसलों से जिले में अपराधियों के मनोबल पर प्रहार होगा और कानून के प्रति जनता का विश्वास और सुदृढ़ होगा।

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