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किशनगंज में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी उपलब्ध न कराने पर बिहार राज्य सूचना आयोग ने ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल किशनगंज-2 के लोक सूचना पदाधिकारी सह कार्यपालक अभियंता पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता हसीबुर रहमान की शिकायत पर की गई है। हसीबुर रहमान ने आरटीआई के माध्यम से सड़क निर्माण कार्यों से संबंधित जानकारी मांगी थी। निर्धारित 30 दिनों की अवधि में सूचना प्राप्त न होने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की। प्रथम अपील पर भी कोई कार्रवाई न होने के बाद, उन्होंने बिहार राज्य सूचना आयोग, पटना में धारा 18 के तहत शिकायत दर्ज कराई। प्रतिदिन 250 रुपये की दर से जुर्माना लगाया गया मामले की सुनवाई के बाद, राज्य सूचना आयुक्त ब्रजेश मेहरोत्रा ने जांच की। आयोग ने पाया कि लोक सूचना पदाधिकारी ने आरटीआई अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन किया है। इसके बाद, अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन 250 रुपये की दर से जुर्माना लगाया गया, जो अधिकतम 25 हजार रुपये तक पहुंच गया। आयोग ने दो अलग-अलग मामलों—पत्रांक 3557 और 3558, दिनांक 20 फरवरी 2026—में आदेश जारी किए। इन दोनों मामलों में 25-25 हजार रुपये का अलग-अलग दंड अधिरोपित किया गया, जिससे कुल अर्थदंड 50 हजार रुपये हो गया। ”आरटीआई केवल एक कानून नहीं, बल्कि जनता की शक्ति” हसीबुर रहमान ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह निर्णय पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दर्शाता है कि यदि नागरिक जागरूक होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन करें, तो सरकारी अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाया जा सकता है। आरटीआई केवल एक कानून नहीं, बल्कि जनता की शक्ति है।” यह घटना बिहार में आरटीआई के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहाँ सूचना छिपाने पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। ऐसे फैसले भ्रष्टाचार को रोकने और प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
ग्रामीण कार्य विभाग के इंजिनियर पर 50 हजार का जुर्माना:किशनगंज में RTI कार्यकर्ता को सूचना नहीं देने पर बिहार आयोग का फैसला
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