चार वर्षीय बिछड़ा बेटा 12 साल बाद मां से मिला:ढोल नगाड़ों की धुन पर गांव में हुआ स्वागत, चाईबासा पुलिस की पहल पर केरल से घर लौटा

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पश्चिमी सिंहभूम जिले में 12 साल पहले परिवार से बिछड़ा बेटा मंगलवार को अपने परिजनों से मिला। चाईबासा पुलिस और सोशल मीडिया की मदद से यह संभव हुआ। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उसका स्वागत किया। अपने बेटे राजा गोप को देख मां खुद के आंसू रोक नहीं पाए। गांव में उत्सव सा माहौल दिखा। जब राजा गुम हुआ था तब उसकी उम्र 4 साल थी। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि पश्चिमी सिंहभूम निवासी राजा गोप लगभग 12 साल पहले अपने परिजनों से बिछड़कर केरल पहुंच गया था। वहां उसे CWC त्रिशूर (केरल) के संरक्षण में रखा गया था। केरल की बाल कल्याण समिति ने चाईबासा पुलिस से संपर्क किया राजा ने केरल की बाल कल्याण समिति को पूछताछ में बताया कि उसका घर चाईबासा जिले के एक पहाड़ी क्षेत्र में है। उसने अपने पिता का नाम बोलराम गोप और माता का नाम मनी गोप बताया। उसका एक बड़ा भाई और दो छोटी बहनें भी हैं। बच्चे से मिली जानकारी के आधार पर केरल की बाल कल्याण समिति ने चाईबासा जिला पुलिस से संपर्क किया। चाईबासा पुलिस ने इसके बाद सोशल मीडिया के माध्यम से राजा के परिजनों तक सूचना पहुंचाई। सोनुआ थाना पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर परिजनों से मिलकर जानकारी का सत्यापन किया। जांच में पुष्टि हुई कि बालक का नाम राजा गोप उर्फ गोमा है, जो ग्राम हाड़ीमारा, थाना सोनुआ, जिला पश्चिमी सिंहभूम का निवासी है। उसका परिवार वर्तमान में पश्चिम बंगाल में मजदूरी करता है। पुलिस राजा गोप को केरल से चाईबासा लाई सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद, पुलिस राजा गोप को केरल से चाईबासा लाई और उसके परिवार को सौंप दिया। मंगलवार को राजा गोप के गांव हार्डीबारा पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और नृत्य के साथ उसका भव्य स्वागत किया। 12 साल बाद बेटे को सामने देखकर उसकी मां भावुक हो गईं। पूरे परिवार के लिए यह खुशी का पल था। फुटबॉल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहता है राजा
इधर, केरल में रहते हुए राजा गोप फुटबॉल का अच्छा खिलाड़ी बन गया है और वह वहां एक क्लब केरल ब्लास्टर्स से जुड़कर फुटबॉल खेलता था। राजा ने बताया कि वह आगे भी फुटबॉल के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहता है और इसके लिए दोबारा केरल लौटने की इच्छा रखता है।

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई मानवीय संवेदनशीलता और सक्रिय पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके माध्यम से 12 वर्षों से बिछड़े एक बच्चे को उसके परिवार से मिलाया जा सका। इस अभियान में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहमन टूटी, पुलिस उपाधीक्षक कुमार विनोद, सोनुआ थाना प्रभारी शशिभूषण भेंगरा, एएसआई इन्द्रदेव रजक तथा रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन चक्रधरपुर (DCPU) के केस वर्कर मनोज कुमार दास की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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