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पश्चिमी सिंहभूम जिले के जगन्नाथपुर प्रखंड की मोंगरा ग्राम पंचायत में पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। बामान बासा और हेस्सापी के रासिका बासा टोला के लगभग 300 परिवार स्वच्छ पेयजल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, ये परिवार पीने और दैनिक उपयोग के लिए चुएं (प्राकृतिक जल स्रोत) के पानी पर निर्भर हैं। ग्रामीण महिलाओं ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि रोजाना सुबह 4 बजे से ही पानी भरने के लिए चुआं के पास लंबी कतार लग जाती है। पानी पूरी तरह दूषित हो जाता अगर कोई परिवार देर से पहुंचता है तो तब तक पानी गंदा हो जाता है और उन्हें करीब एक घंटे तक पानी के लिए फिर से रिसने का इंतजार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब पानी पूरी तरह दूषित हो जाता है। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि कई बार गंदा पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों में पेट संबंधी बीमारियां फैल चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि गांव में हैंडपंप का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों की शिकायत पर आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया ने गांव का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने उनके समक्ष अपनी समस्याएं रखीं और तत्काल समाधान की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनके गांव में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है, जिससे उन्हें प्रतिदिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र
मानसिंह तिरिया ने कहा कि वे पिछले तीन वर्षों से जिलापरिषद की सामान्य बैठकों में इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं, लेकिन हर बार विभागीय अधिकारियों द्वारा टेंडर प्रक्रिया का हवाला देकर मामले को टाल दिया जाता है। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र उपायुक्त को सौंपा गया, जिस पर उपायुक्त ने शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


