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सिटी रिपोर्टर|बोकारो होली पर्व समाप्त होने के साथ ही चैत्र माह की वासंतिक नवरात्र की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। वासंतिक नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च को होगा। नवरात्रि के पहले दिन शुभ योग के साथ उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस वर्ष माता जगत जननी डोली पर सवार हो कर आएंगी और हाथी पर मां की विदाई होगी। श्रद्धालु भक्त मां दुर्गा की आराधना करेंगे। सूर्य, चंद्र के प्रभाव से इस बार पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा। नवरात्र के दौरान शक्ति के साथ भगवान सूर्य व भगवान विष्णु की आराधना भी होगी। मंदिरों और घरों में कलश स्थापना कर भक्त उपवास रखते हुए मां दुर्गा की आराधना करेंगे। नवरात्र की शुरुआत शुभ और ब्रह्म योग में हो रही है। पुजारी के अनुसार यह अत्यंत शुभ फलदायी योग है। इस योग में की गई पूजा, साधना और आराधना का विशेष फल मिलता है। पंडित अखिलेश ओझा ने बताया कि चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च को होगी। इस बार ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय पूर्व) कलश की स्थापना घर के साथ देवी मंदिरों में नहीं होगी। इसका कारण अमावस्या तिथि का रहना है। पंचांग के मंथन के बाद निष्कर्ष निकाला गया है कि अमावस्या तिथि 19 मार्च की सुबह 06.39 तक है। प्रतिपदा की शुरुआत सुबह 06.40 से हो रही है, इसलिए श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में ही कलश की स्थापना करें। इस बार कलश स्थापना का समय 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बज कर 43 मिनट तक रहेगा। 10.30 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है। 22 मार्च को चैती छठ का नहाय-खाय लोक आस्था का महापर्व चैती छठ 22 मार्च से शुरू होगा। चार दिनों तक चलने वाले पर्व में श्रद्धालु व्रत रखकर सूर्य देव की पूजा करेंगे। 22 मार्च को नहाय-खाय, 23 मार्च को खरना पूजा की जाएगी।
चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू, डोली पर आएंगी और हाथी पर जाएंगी मां दुर्गा
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