जलमीनार चालू, लेकिन आपूर्ति बंद

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भास्कर न्यूज | नवादा शहर के बुधौल, वार्ड संख्या- 05 में स्थित जलापूर्ति केंद्र और जलमीनार इन दिनों ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। लाखों रुपये की लागत से बने इस जलमीनार और जलापूर्ति केंद्र का उद्देश्य क्षेत्र के घर-घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि पानी लोगों के घरों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है। नतीजतन यह पूरी योजना अब केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। ग्रामीणों के अनुसार जलापूर्ति केंद्र चालू तो है, परंतु उससे निकलने वाला पानी वार्ड के अधिकांश घरों तक नहीं पहुंचता। वार्ड में कई जगहों पर पाइप फटे हुए हैं और पाइपलाइन की मरम्मत लंबे समय से नहीं की गई है। जगह-जगह रिसाव होने के कारण पानी बीच रास्ते में ही बह जाता है। परिणामस्वरूप जिन घरों तक पहले नियमित जलापूर्ति होती थी, वहां अब पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच रही है। गर्मी के मौसम में पानी की आवश्यकता अधिक होती है, ऐसे में जलापूर्ति में कमी लोगों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।वार्ड में एक बड़ा जलमीनार भी बना हुआ है, लेकिन वह भी किसी काम का साबित नहीं हो रहा। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार में पानी का समुचित स्टोरेज नहीं होता और न ही उससे पानी की निकासी की कोई प्रभावी व्यवस्था है। करोड़ों की लागत से बने इस ढांचे का उपयोग न होने से सरकार की योजना पर सवाल उठ रहे हैं।इसके साथ ही वार्ड संख्या 05 बुद्यौल में एक और जलापूर्ति केंद्र है जिससे भी पानी की आपूर्ति कम हो रही हैं।नाला निर्माण में लगे जेसीबी के द्वारा गड्ढा किए जाने के बाद कई जगह पाइप फट गया है। नियमित निरीक्षण नहीं होने से स्थिति बिगड़ी ग्रामीणों ने बताया कि पहले इसी जलापूर्ति केंद्र से जंगल बेलदारी तक कई घरों में पानी की आपूर्ति होती थी। उस समय लोगों को पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता था। लेकिन पिछले पांच वर्षों से स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। वर्तमान में जलापूर्ति केंद्र का पानी केवल दो से पांच घरों तक ही सीमित रह गया है। इससे बाकी परिवारों को या तो निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है या फिर दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इस जलापूर्ति केंद्र का रखरखाव लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण यांत्रिकी विभाग के अधीन था। विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाता था, जिससे व्यवस्था सुचारु रूप से चलती रहती थी। लेकिन जब से इस कार्य को सिविल विभाग के माध्यम से ठेकेदार के हाथों सौंपा गया है, तब से देखरेख की स्थिति बदतर हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब न तो नियमित निरीक्षण होता है और न ही खराब पाइपलाइन या उपकरणों की मरम्मत पर ध्यान दिया जाता है। पिछले दो-चार दिनों से जलापूर्ति केंद्र से पानी की मात्रा भी काफी कम हो गई है।

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