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भास्कर न्यूज| गिरिडीह गिरिडीह जिले में कानूनी रूप से िसर्फ 5 आरा मील है, जबकि 65 आरा मिल अवैध रूप से चल रही हैं। इन अवैध आरा मिलों के संचालन से न सिर्फ हरे भरे पेड़ों को कत्लेआम किया जा रहा है, बल्कि जंगलों की भी उजाड़ा जा रहा है। सखुआ सहित अन्य कीमती पेड़ खत्म करने के बाद अब लकड़ी तस्कर अकेशिया को उजाड़ने में जुटे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में अकेशिया का जमकर इस्तेमाल हो रहा है। जंगलों से चोरी की गई अकेशिया पेड़ काटकर धंधेबाज अपने मीलों में उसकी चीराई करते हैं और फिर चौखट, पलंग, सोफा बनाकर महंगे दामों में उसकी बिक्री कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से लेकर शहर तक आपूर्ति होने वाला 90 फीसदी फर्नीचर अकेशिया का ही होता है। जबकि वनभूमि छोड़ कहीं भी अकेशिया का पेड़ नहीं है। इसके अलावा अन्य हरे-भरे पेड़ों को काटकर धंधेबाज पर्यावरण को क्षति पहुंचा रहे हैं। लेकिन इस गंभीर विषय पर वन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। इस अवैध कारोबार में सबसे ज्यादा धनवार व जमुआ अंचल के धंधेबाज सक्रिय हैं। जहां पांच मील घोड़थंभा बाजार और आसपास में संचालित है। वहीं जमुआ के धुरगड़गी पंचायत अंतर्गत अंधरकोला में एक कतार में 4 अवैध आरा मील चल रहे हैं, जहां दिन दहाड़े अवैध लकड़ियों की चीराई होती है। इन अवैध मीलों में जंगलों से कटाई की गई लकड़ियों के अलावा ग्रामीणों के घरों, बगीचों और खेतों से ली गई लकड़ियां भी चिराई के लिए लाई जाती हैं। लेकिन कार्रवाई के नाम पर वन विभाग सिर्फ औपचारिकता ही पूरी करती है। कुछ मील संचालकांे ने ‘फोल्डिंग सिस्टम’ आरा मील स्थापित कर रखा है। जहां छापेमारी की भनक लगते ही आसानी से मशीन हआ लेता है और कुछ दिनों बाद फिर से काम शुरू कर देता है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक कार्रवाई सतत और प्रभावी नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि धूल, शोर और लकड़ी की भारी मात्रा उनके स्वास्थ्य और जीवन पर गंभीर असर डाल रही है। स्थिति यह दर्शाती है कि अवैध आरा मिलों का नेटवर्क न केवल वन संपदा के लिए खतरा है, बल्कि पर्यावरण का भी दुश्मन बन चुका है। घोड़थंभा में संचालित आरा मिल। जिले के इन आरा मिलों के पास है लाइसेंस गिरिडीह शहर के स्टेशन रोड स्थित भारत टिंबर, हरसिंगरायडीह में राजेंद्र प्रसाद वर्मा और धनवार नगर पंचायत में दो संचालकों के पास लाईसेंस है। गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल में अवैध आरामील गांडेय के लखनपुर, चौरा, गांडेय और खोरीमहुआ मंे 10 आरामील , देवरी के गोरटोली, घोसे, चहाल, तोगरा, पिपराटांड़, भेलवाघाटी में 12 आरामील , गावां के लोठियाटांड़ सहित अन्य इलाकों में 6 आरामील , बेंगाबाद के भंडारीडीह, लखनपुर, चक्रदाहा, चपुआडीह, डाकबंगला में 8 आरामील , इसके अलावा पीरटांड़ व मुफ्फसिल इलाके में भी कई आरामील चल रहे हैं। अवैध आरा मिलों को किया जाएगा ध्वस्त : डीएफओ गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष तिवारी ने बताया कि पूर्वी वन प्रमंडल क्षेत्र मंे जिन इलाकों में आरा मिल चल रहा है। सभी को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके लिए रेंजर को निर्देश दिया जाएगा। ताकि एक भी आरा मिल क्षेत्र में नहीं चल सके। धनवार में सबसे अधिक चल रही है 10 आरा मिल धनवार अंचल में कुल 10 आरा मिल संचालित हैं। इनमें पांच मिल घोड़थंभा बाजार में हैं, घोड़थंभा बाजार हाल के वर्षो में फर्नीचर निर्माण का बड़ा केंद्र बन चुका है। इन मिलों का संचालन स्थानीय फर्नीचर उद्योग की लगातार बढ़ती मांग पर निर्भर करता है। इसके अलावा बेको, बोदगो, श्रीरामडीह और जेहनाडीह में एक-एक मिल अवैध रूप से काम कर रहा है। वहीं धनवार प्रखंड की सीमा से सटे जमुआ प्रखंड के करिहारी पंचायत में तीन अवैध आरा मिल चल रहें है। जबकि सरिया में 5, बिरनी में 9 तथा बगोदर में 6 अवैध आरा मिल लगातार संचालन में हैं। गिरिडीह पश्चिमी वन प्रमंडल में अवैध आरा मिल धनवार के घोड़थंभा में 5 सहित, बेको, बोदगो, श्रीरामडीह और जेहनाडीह में कुल 14 आरामील , जमुआ के धुरगड़गी व इसी पंचायत के अंधरकोला में 6 समेत करिहारी, तारा, कारोडीह, धरचांची, भंडारो में 15 आरामील बिरनी के झरखी, ओरगो, कटरियाटांड़, पलौंजिया, कपिलो, महथाडीह, भरकट्टा, जुठाआम, सुइयाडीह में 10 आरामील । वन विभाग की कार्रवाई के बाद भी असर नहीं वन विभाग समय-समय पर छापेमारी करता है, लेकिन इसका असर स्थायी नहीं होता। मिल संचालक छापेमारी के दौरान मशीनें हटाकर बच जाते हैं और कुछ ही दिनों में काम फिर से शुरू कर देते हैं। जुर्माने और जब्ती का नुकसान तस्करों के लिए नगण्य होता है। वन विभाग की माने, तो अवैध मिलों पर लगातार निगरानी रखना कठिन है। तस्करों का नेटवर्क बहुत मजबूत और व्यवस्थित है। जिस वजह से आरा मिल संचालन का धंधा बेखौफ होकर चल रहा है।
जिले में सिर्फ 5 लासेंसी और संचालित हो रही 65 अवैध आरा मिल, जंगलों को उजाड़ रहे हैं तस्कर
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