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देश के पहले राष्ट्रपति, महान स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 63वीं पुण्यतिथि आज मनाई गई। इस अवसर पर गया में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जहां कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राजेंद्र टावर चौक स्थित उनकी प्रतिमा के सामने और जिला कांग्रेस कार्यालय राजेंद्र आश्रम में आयोजित कार्यक्रमों में माल्यार्पण कर उनके राष्ट्रनिर्माण में योगदान को याद किया गया। संगठन को सशक्त दिशा दी सभा में वक्ताओं ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारतीय लोकतंत्र का मजबूत आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि वे स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी नेता थे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को सशक्त दिशा दी। संविधान सभा के अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने संविधान निर्माण प्रक्रिया को संतुलित, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित किया, जिसे भारतीय इतिहास में उनका अमिट योगदान माना जाता है। नेताओं ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के गया से विशेष ऐतिहासिक संबंध पर प्रकाश डाला। उनके कई महत्वपूर्ण प्रवास और पारिवारिक जुड़ाव के कारण ही साल 1935 में जिला कांग्रेस कार्यालय का नाम ‘राजेंद्र आश्रम’ रखा गया था। यह स्थान आज भी उनके विचारों और आदर्शों का प्रतीक है। गया नगर निगम क्षेत्र में स्थापित उनकी प्रतिमा नागरिकों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती है। वक्ताओं ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के व्यक्तित्व पर भी बात की। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में उनकी प्रतिभा इतनी असाधारण थी कि परीक्षकों ने उनकी उत्तर पुस्तिकाओं पर ‘Examinee is better than examiner’ जैसी टिप्पणी लिखी थी। उनका जीवन सादगी, त्याग और सेवा का आदर्श उदाहरण है, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। इस कार्यक्रम में प्रदेश प्रतिनिधि सह प्रवक्ता विजय कुमार मिट्ठू समेत कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। नेताओं ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से गया समाहरणालय गोलंबर पर डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी की। उनका कहना था कि इससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से निरंतर प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगी।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा:गया में कांग्रेसियों ने योगदान को किया याद, कहा- संगठन को सशक्त दिशा दी थी
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