तृणमूल उम्मीदवार राजीव कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा पर्चा, पूर्व नौकरशाह का रहा है राजनीति से गहरा रिश्ता

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तृणमूल उम्मीदवार राजीव कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा पर्चा, पूर्व नौकरशाह का रहा है राजनीति से गहरा रिश्ता

Rajeev Kumar: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में डीजीपी के पद से सेवानिवृत्ति के बाद राजीव कुमार ने अपनी सियासी पारी शुरू कर दी है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में उन्होंने पर्चा दाखिल कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा की चार सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. राजीव कुमार का नाम उनमें शामिल है. राजीव कुमार का सियासत में भले ही यह पहला कदम है, लेकिन उनका राजनीति से गहरा रिश्ता है. राजीव कुमार मुरादाबाद के पूर्व सांसद प्रोफेसर रामशरण के पोते हैं. राजीव के बड़े दादा (पिता के ताऊ) प्रोफेसर रामशरण देश की आजादी से पहले ही 1937 में प्रोवेंशियल असेंबली के एमएलए रहे थे. 1952 से 1962 तक मुरादाबाद के सांसद (एमपी) रहे थे.

मुझ पर इतना भरोसा नहीं करना चाहिए

आज सुबह राजीव कुमार विधानसभा आए. फिर वे मुख्य सचिव के कमरे में जाकर बैठ गए. वहाँ मीडिया ने राजीव से पूछा कि वे इतने लंबे समय तक आईपीएस अधिकारी रहे हैं, उन्हें इस क्षेत्र का कुछ अनुभव है और वर्तमान में वे तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार हैं. एक राजनेता होने के नाते, उन्हें इस बारे में कैसा लगता है. जवाब देते हुए उन्होंने मदर टेरेसा का एक कथन उद्धृत किया और मीडिया से कहा- मदर टेरेसा कहती हैं, मेरा मानना ​​है कि ईश्वर मुझे कोई ऐसी जिम्मेदारी नहीं देंगे, जिसे मैं संभाल न सकूँ. उन्हें मुझ पर इतना भरोसा नहीं करना चाहिए. इसके बाद उन्होंने कोई और टिप्पणी नहीं की. हालांकि, मदर टेरेसा के इस कथन में उन्होंने बहुत कुछ स्पष्ट कर दिया है.

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पुलिस कमिश्नर समेत कई बड़े पदों पर रहे

राजीव कुमार कक्षा 12 तक की पढ़ाई चंदौसी से की है. उनके पिता प्रोफेसर आनंद कुमार चंदौसी के मशहूर कॉलेज (एसएम स्नातकोत्तर महाविद्यालय) में समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष रहे थे. 12वीं में यूपी बोर्ड की मेरिट में स्थान और शहर के टॉपर की उपलब्धि हासिल करने वाले राजीव ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए एक ही वर्ष में एमएलएनआर, रुड़की यूनिर्विसिटी (तब रुड़की आईआईटी का दर्जा नहीं था) और आईआईटी में चयन में सफलता हासिल की थी. बीटेक के बाद वह आईपीएस बनने में सफल रहे. पश्चिम बंगाल कैडर आवंटित होने के बाद उन्होंने उसी राज्य में आईपीएस की पारी कुछ दिन पहले ही पूरी की है. इस दौरान वह कोलकाता के पुलिस कमिश्नर समेत कई बड़े पदों पर रहे, जबकि पश्चिम बंगाल के डीजीपी का कार्यकाल पूरा होने के साथ उनकी सेवानिवृत्ति हो गई.

ममता के बेहद करीब रहे हैं राजीव कुमार

राजीव कुमार में पढ़ाई के प्रति लगाव पिता प्रोफेसर आनंद कुमार (अब दिवंगत) से मिला तो राजनीतिक सूझ दादा रामशरण दास से मिली है. राजीव कुमार का शुमार ममता बनर्जी के अति भरोसेमंद लोगों में है. टीएमसी से राज्यसभा के लिए राजीव को उम्मीदवार बनाए जाने से जहां इस बात पर मुहर लग गई है, वहीं पूर्व में राजीव के खिलाफ दिल्ली से सीबीआई टीम पहुंचने पर उनकी गिरफ्तारी रोकने के लिए ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई थीं. सीबीआई टीम की लोकल (बंगाल की) पुलिस से घेराबंदी भी करा ली थी.

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