![]()
शहर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से इंडक्शन चूल्हों की मांग इतनी बढ़ गई है कि ब्रांडेड इंडक्शन आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। बाजार में पारंपरिक चूल्हे कई डिजाइन में मिल रहे हैं। वहीं, पुराने जमाने के हीटर भी दिखने लगे हैं। कोयला चूल्हा 300 से 1200 रु और इलेक्ट्रिक हीटर 800 से 1200 रु. तक मिल रहे हैं। वहीं, शहर के कई होटल अब डीजल चूल्हा लगाने की तैयारी में हैं। स्टेशन रोड स्थित कोणार्क होटल के संचालक रंजीत राजपाल ने कहा कि वे डीजल चूल्हा का ऑर्डर दे चुके हैं, जिसकी कीमत ₹16,000-20,000 है। शहर के 90% होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड स्टॉल्स में कोयले और लकड़ी के चूल्हों का प्रयोग बढ़ गया है। 500 रुपए में बिकने वाला पुराने जमाना का हीटर भी 800 से 1200 में बिक रहा होटल एंबेसी के संचालक रोहित कुमार ने बताया कि बड़े और कॉमर्शियल इंडक्शन 12 से 15 हजार रुपए में मिल रहा है। विक्रेता प्रवीण कुमार ने कहा कि 500 रुपए में बिकने वाला पुराना जमाना का हीटर भी 800 से 1200 रुपए में बिक रहा है। एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के चलते इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ने से कीमतें 40% तक बढ़ गई हैं। बजाज के डीलर मुकेश अग्रवाल ने बताया कि कंपनी बढ़ी हुई मांग को पूरा नहीं कर पा रही है। अभी भी रांची में एक दिन में 1000 से ज्यादा इंडक्शन बिक रहे हैं। ब्रांडेड इंडक्शन आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। 200 की कोयला बोरी 350 रु : होटल संचालकों ने बताया कि 25 किलो की कोयला बोरी का दाम वेंडर 300 से 350 रुपए ले रहे हैं, जो पहले 200 रु. में मिलती थी। वहीं, स्ट्रीट फूड व्यापारियों ने कहा कि इस समय छोटा सिलेंडर भी नहीं मिल पा रहा है। कोयला काफी महंगा मिल रहा है। कोकर में चाउमिन बेचने वाले स्ट्रीट वेंडर राजू कुमार ने बताया कि उन्हें एक किलो गैस भरवाने में 350 रुपए लग रहे हैं, जो पहले सौ रुपए में मिलती थी। 90 प्रतिशत से ज्यादा होटल- रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड व्यापारियों ने कोयले- लकड़ी के चूल्हों का उपयोग बढ़ाया है। मांग बढ़ने से चूल्हों की कीमत पर असर पड़ा है। रांची शहर में प्रति दिन लगभग 500 चूल्हों की बिक्री हो रही है। अपर बाजार में ही फरवरी में 250 रुपए में बिकने वाला चूल्हा अभी 600 रुपए में बिक रहा है। बड़ी भट्ठी वाले चूल्हे 1100 रुपए तक बिक रहे हैं। पहले ये चूल्हे 600 रुपए में मिलते थे। पर्ल रेसीडेंसी, होटल बीएनआर चाणक्या जैसे कई बड़े होटलों में कोयले के भट्ठे बनाए गए हैं।


