
बड़ी राहत या कार्रवाई? सबकी निगाहें रांची पर, सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्ट नहीं होने से अब हाइकोर्ट के रुख पर टिका भविष्य
वरीय संवाददाता, जमशेदपुर
जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण को लेकर चल रहे कानूनी घमासान में सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण है. नौ मार्च को इस मामले की सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में होगी. हालांकि पहले सुप्रीम कोर्ट में भी इसी दिन सुनवाई होनी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सोमवार नौ मार्च को सुनवाई नहीं होगी, क्योंकि वहां केस की लिस्टिंग नहीं हो सकी है. अब शीर्ष अदालत में अगली तिथि तय की जायेगी. ऐसे में अब शहरवासियों और प्रभावित भवन मालिकों की निगाहें पूरी तरह से हाइकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं.चीफ जस्टिस की खंडपीठ करेगी सुनवाई
हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. इससे पहले 15 जनवरी को हाइकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जेएनएसी क्षेत्र के 24 अवैध भवनों के विवादित हिस्से को एक महीने के भीतर ध्वस्त करने का लिखित आदेश दिया था. कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन के मामले में किसी भी तरह की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
21 मालिकों को मिला है ””””कवच””””, दो पर तलवार लटकी
कुल 24 भवन मालिकों में से 21 को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल चुका है, जबकि एक को हाइकोर्ट से राहत मिली है, लेकिन दो भवन मालिक (साकची के एसके एकथ और सत्यनारायण मारवाड़ी) ऐसे हैं, जो न तो हाइकोर्ट गये और न ही सुप्रीम कोर्ट. ऐसे में कानूनी विशेषज्ञों की मानें, तो इन पर कार्रवाई का खतरा बरकरार है.एक नजर में अब तक क्या हुआ
– साकची निवासी राकेश कुमार झा द्वारा दायर जनहित याचिका (2078/2018) पर हाइकोर्ट ने ध्वस्त करने का आदेश दिया था.
– हाइकोर्ट के आदेश के खिलाफ भवन मालिक सुप्रीम कोर्ट गये थे. कोर्ट ने दो फरवरी को कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी गयी थी.– दो फरवरी को जब जेएनएसी ने साकची और बिष्टुपुर में अभियान शुरू किया था. उसी दौरान सुप्रीम कोर्ट के स्टे की खबर आने के बाद अभियान रोकना पड़ा था.
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