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नवादा जिले में इस बार होली का जश्न अपनी पुरानी परंपरा ‘कुर्ता फाड़ होली’ के साथ चरम पर पहुंच गया। शहर और आसपास के इलाकों में युवाओं की टोलियां एक-दूसरे के कुर्ते फाड़ते, पुराने फगुआ और लोक गीतों की धुन पर नाचते और रंगों में सराबोर होते दिखे। यह परंपरा बिहार की होली की एक खास पहचान है। इसमें लोग सफेद या पुराने कुर्ते पहनकर एक-दूसरे के कपड़े फाड़ते हैं, मिट्टी-कीचड़ में लोट-पोट होते हैं और अबीर-गुलाल से होली खेलते हैं। इस वर्ष नवादा में युवा टोलियों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर इस पुरानी परंपरा को उत्साह के साथ मनाया। बाजारों में सफेद कुर्ते-पजामे की खरीदारी बढ़ी
कई स्थानों पर कीचड़ भरे मैदानों में विशेष उत्साह देखा गया, जहाँ रंग, मिट्टी और पानी का मिश्रण होली के अनुभव को और गहरा कर रहा था। स्थानीय युवाओं के अनुसार, यह केवल रंग खेलने का त्योहार नहीं है, बल्कि पुरानी संस्कृति को संरक्षित करने और आपसी दोस्ती व भाईचारे को मजबूत करने का एक माध्यम भी है। मगध क्षेत्र की इस होली में कभी-कभी राजनीतिक रंग भी देखने को मिलता रहा है, लेकिन इस बार आम जनता और युवाओं का उत्साह विशेष रूप से अधिक था। बाजारों में सफेद कुर्ते-पजामे की खरीदारी भी खूब हुई, जो इस परंपरा की लोकप्रियता को दर्शाता है। नवादा की सड़कों पर रंगों की बौछार और कुर्ते फाड़ने के इस अनूठे उत्सव ने होली को यादगार बना दिया। यह उत्साह दर्शाता है कि बिहार की पुरानी होली परंपराएं आज भी जीवंत हैं और नई पीढ़ी इन्हें पूरे जोश के साथ आगे बढ़ा रही है।
नवादा में कुर्ता फाड़ होली की धूम:युवाओं की टोलियां रंग-कीचड़ में मस्ती, ढोल-नगाड़ों पर फगुआ, बाजारों में सफेद कुर्ते की बढ़ी खरीदारी
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