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पटना सिविल कोर्ट से मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज होने के बाद मंगलवार के दिन पीड़ित पक्ष के वकील एसके पांडे ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई थी। उन्होंने इस दौरान जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसियां जांच के नाम पर पीड़ित पक्ष के लोगों पर दबाव बना रही है। उन्होंने बताया कि अदालत का जो फैसला आया है, उसकी ऑनलाइन कॉपी हमने नेट से डाउनलोड कर ली है। मोटा मोटी देखने से कमोबेश यही है कि मनीष रंजन की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। जांच एजेंसियों को अदालत ने कुछ निर्देश दिए हैं। जिसका एजेंसियों को पालन करना होगा। पुलिस और जांच एजेंसियां तथ्यों को छिपाते हुए जनता में भ्रम फैला रही है। इन लोगों ने पहले ही डिसाइड कर रखा है कि इस केस में असली गुनहगारों को बचाना है, और मुल्जिमों को क्लीन चीट देनी है। इन लोगों ने अदालत में खुल्लम खुल्ला कहा कि मनीष रंजन को जमानत दे दी जाए। केस को पूरी तरह से लीपापोती करने की कोशिश जारी है एसके पांडे ने कहा कि मेरे नॉलेज में तो नहीं है कि इस तरीके से कोई जांच अधिकारी मुल्जिम की पैरवी करता हो, या कभी किया है। इस केस को पूरी तरह से लीपापोती करने की कोशिश जारी है। CBI भी बिहार पुलिस और SIT के नक्शे कदम पर चल रही है। जानबूझकर मृतक परिवार को परेशान किया जा रहा है। मैं जांच एजेंसियों से कहना चाहता हूं कि आप मृतक परिवार से पूछताछ कर रहे हैं तो कानूनी मर्यादा का ख्याल रखें। वकील बोले- मनीष रंजन से कोई पूछताछ नहीं की उसे लिखित में नोटिस भेजे या आने की सूचना दें। लेकिन बिना कोई सूचना दिए अनेकों बार मृतक परिवार के पास पहुंच गए। उन्होंने मनीष रंजन से कोई पूछताछ नहीं की। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ नहीं हुई। घटना वाले दिन हॉस्टल में कितने कर्मचारी थे। इसके बारे में पूछताछ नहीं हुई। हॉस्टल में खाना कौन बनाता था। गार्डन कौन था। हॉस्टल के कितने कर्मचारी थे। हॉस्टल में कितनी बच्चियों मौजूद थी। इन सब चीजों के बारे में पूछताछ नहीं हो रही है। बगैर नोटिस दिए जांच एजेंसियां मृतक परिवार से पूछताछ करने पहुंच जा रही है। बिना लिखित सब प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्हें प्रताड़ित करना। यह जांच के नाम पर उनके ऊपर ही दबाव बनाना है।
नीट छात्रा रेप-मौत केस: जांच एजेंसियों पर सवाल:पीड़ित पक्ष के वकील बोले- अदालत में खुलेआम जांच अधिकारी आरोपी की पैरवी करते दिखे
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