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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन दाखिल करने के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नीतीश कुमार को शुभकामनाएं दीं, लेकिन साथ ही उनकी कई नीतियों पर सवाल भी उठाए। सांसद सुधाकर सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि बिहार के विकास के मुद्दों पर उनका और नीतीश कुमार का हमेशा मतभेद रहा है। उन्होंने नीतीश कुमार के कई फैसलों का खुलकर विरोध किया है। सिंह के अनुसार, इन नीतियों का खामियाजा बिहार की जनता, विशेषकर किसानों और युवाओं को भुगतना पड़ा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद नीतीश कुमार के प्रति उनकी व्यक्तिगत संवेदनाएं हमेशा रही हैं। सिंह ने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि जब वे दिल्ली में रहते थे, तब नीतीश कुमार उनके लिए ‘लोकल गार्जियन’ की तरह थे। दबाव राज्यसभा जाने का लिया फैसला उन्होंने कहा कि आज नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन के इस मोड़ को देखकर उनके मन में कई भाव आ रहे हैं। सिंह ने यह भी संकेत दिया कि राज्यसभा जाना भले ही व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा हो, लेकिन बिहार की राजनीति के जानकार मानते हैं कि इसके पीछे कुछ दबाव भी हो सकता है। सुधाकर सिंह ने 2006 में बिहार की कृषि मंडियों को समाप्त करने के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने बिहार के किसानों को बाजार से बेदखल कर दिया, जिसके कारण आज भी किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सत्ता हस्तांतरण का चल रहा प्रयास इस बीच, भाकपा माले के नेता और डुमरांव के पूर्व विधायक अजीत सिंह कुशवाहा ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बिहार में शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण का प्रयास चल रहा है। कुशवाहा के अनुसार, जो कुछ हो रहा है, वह केवल नीतीश कुमार की इच्छा नहीं लगती, बल्कि इसके पीछे कुछ मजबूरियां भी हो सकती हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार की राजनीति में इसे लेकर चर्चाओं और कयासों का दौर तेज हो गया है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन पर सियासत तेज:बक्सर सांसद सुधाकर सिंह बोले-दबाव के कारण लिया फैसला, सत्ता हस्तांतरण का चल रहा प्रयास
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