पंचायती विभाग ने कहा- 67 एकड़ में फैले ब्रांबे कैंपस को खाली करे सीयूजे

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ब्रांबे स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान का परिसर अब राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। यह परिसर 67 एकड़ 52 डिसमिल में फैला हुआ है। इसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड (सीयूजे) को अपना स्थायी कैंपस बनने तक संचालन के लिए दिया गया था। अब सीयूजे नए कैंपस में शिफ्ट हो चुका है। ऐसे में एक ओर पंचायती राज विभाग, जेएसएससी से नियुक्त लेखा पदाधिकारियों, पंचायत प्रतिनिधियों और नव-नियुक्त कर्मियों के लिए यहां बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में है। वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग इसी परिसर को प्रस्तावित मेडिकल यूनिवर्सिटी के आधारभूत ढांचे के रूप में देख रहा है। इसी कारण सरकार ने सीयूजे से परिसर खाली करने को कहा है। खाली कराने के आदेश में संशोधन सरकार ने परिसर खाली कराने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी को लिखे पत्र में संशोधन किया है। पहले 16 फरवरी को जारी आदेश में दो माह के भीतर परिसर खाली करने को कहा गया था। बाद में 19 फरवरी को संशोधित आदेश जारी कर अविलंब परिसर खाली करने के निर्देश दिए गए। पंचायती राज विभाग के अपर सचिव मनोज कुमार द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दो माह की समय-सीमा टंकण त्रुटि थी। यह है पूरा मामला विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2009 में यह परिसर दो वर्षों की अवधि के लिए सीयूजे को उपयोग हेतु दिया गया था। बाद में संबंधित पक्ष के अनुरोध पर समय-सीमा बढ़ाई गई। हालांकि वर्ष 2015 के बाद आगे कोई अवधि विस्तार नहीं दिया गया। सरकार ने 24 जुलाई 2015 को ही इसकी सूचना सीयूजे को दे दी थी। इसके बावजूद परिसर खाली नहीं किया गया। इधर, सीयूजे ने अपनी अधिकतर शैक्षणिक गतिविधियां नए स्थायी कैंपस में स्थानांतरित कर दी हैं। सरकार का तर्क जेएसएससी से नियुक्त एकाउंट अफसर समेत अन्य नव-नियुक्त कर्मियों के लिए प्रशिक्षण केंद्र शुरू करना है। पंचायत प्रतिनिधियों को विकास योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाना है। इसी परिसर में प्रस्तावित मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जानी है। आदेशों की पूरी टाइमलाइन 8 जनवरी 2026 : परिसर खाली कराने को पहला पत्र जारी। 2 फरवरी 2026 : खाली करने के लिए स्मार पत्र भेजा गया। 16 फरवरी 2026 : दो माह के भीतर परिसर खाली करने का आदेश। 19 फरवरी 2026 : संशोधित आदेश में अविलंब खाली करने के निर्देश। सरकार का कहना है कि अब जब विश्वविद्यालय अपने नए परिसर में स्थानांतरित हो चुका है, तो राज्य की प्राथमिक परियोजनाओं के लिए इस परिसर का उपयोग किया जाना जरूरी है।

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