पटना में आज लाइब्रेरियन कैंडिडेट्स का प्रदर्शन:सेंट्रल लाइब्रेरी से कारगिल चौक तक निकाला जाएगा मार्च, 17 साल से नहीं निकली वैकेंसी

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बिहार में लाइब्रेरियन बहाली की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थियों में आक्रोश है। लंबे समय से नियुक्ति की मांग कर रहे उम्मीदवार अब सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए हैं। ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन की ओर से आज 24 फरवरी को पटना में आक्रोश मार्च निकाला जाएगा। मार्च की शुरुआत पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी से होगी और समापन कारगिल चौक पर किया जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार ने बहाली की नियमावली तो जारी कर दी, लेकिन अब तक लाइब्रेरी पात्रता परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की गई है। पटना जिला अध्यक्ष हर्षित राज ने बताया कि यह मार्च सरकार तक अभ्यर्थियों की मांग पहुंचाने का प्रयास है। यदि जल्द परीक्षा तिथि घोषित नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 10 हजार से अधिक पद खाली बिहार में लाइब्रेरियन के करीब 10 हजार पद रिक्त हैं। इनमें प्लस टू स्कूलों से लेकर कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक के पद शामिल हैं। पद खाली रहने के कारण लाइब्रेरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कई जगहों पर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही कार्य संभाल रहे हैं। नई नियमावली के बाद भी ठप प्रक्रिया सरकार ने 2020 में नई नियमावली लागू की थी, जिसके तहत लाइब्रेरियन पद पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य की गई। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता लाइब्रेरी साइंस में स्नातक (बी.लिब) निर्धारित है। इसके बावजूद 4 साल बीत जाने पर भी परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। बिहार में अंतिम बार 2008 में लाइब्रेरियन पदों पर नियुक्ति हुई थी। तब बिना पात्रता परीक्षा के बहाली की गई थी। उसके बाद से 17 वर्षों से कोई नई नियुक्ति नहीं हुई। लंबे इंतजार के कारण कई अभ्यर्थियों की आयुसीमा समाप्त हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की सुस्ती से लाखों युवाओं का भविष्य अधर में है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कब तक परीक्षा तिथि घोषित कर बहाली प्रक्रिया शुरू करती है।

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