
Pashchim Bangal 2021 Chunav Parinam: 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ने राजनीतिक इतिहास रच दिया. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने जबरदस्त वापसी करते हुए सत्ता बरकरार रखी, जबकि बीजेपी ने अपनी सीटों में भारी इजाफा किया लेकिन बहुमत से काफी दूर रह गयी. कुल 294 सीटों (292 सीटों पर मार्च-अप्रैल में चुनाव हुए) वाली इस जंग में टीएमसी ने भारी बहुमत हासिल किया. 2021 के बंगाल चुनाव में टीएमसी की यह लगातार तीसरी जीत थी. यह चुनाव 8 चरणों में हुआ और परिणाम 2 मई 2021 को आये. इस चुनाव में टीएमसी की ‘किलेबंदी’ और ‘बंगाली अस्मिता’ का नारा कामयाब रहा.
2021 चुनाव के नतीजे
| कुल सीटें | 294 (292 पर मतदान, 2 सीटों पर बाद में) |
| टीएमसी | 213 सीटें (वोट शेयर करीब 48%) |
| बीजेपी | 77 सीटें (वोट शेयर करीब 38%) |
| अन्य | 2 सीटें (इंडियन सेक्युलर फ्रंट और निर्दलीय) |
| लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस | 0 सीटें |
2021 में 2016 से बेहतर रहा तृणमूल कांग्रेस का प्रदर्शन
टीएमसी का प्रदर्शन पिछले चुनाव यानी वर्ष 2016 की तुलना में बेहतर रहा. 2021 में उसने 213 सीटों पर जी दर्ज की. बीजेपी ने भी 2021 के चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया. यह अब तक का उसका सबसे बढ़िया परफॉर्मेंस था. वर्ष 2016 में पार्टी ने सिर्फ 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2021 में उसके रिकॉर्ड 77 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की. उसका वोट शेयर 38 प्रतिशत पहुंच गया.
टीएमसी की जीत के प्रमुख कारण
ममता बनर्जी ने कल्याणकारी योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और ‘बंगाल की बेटी’ वाली छवि पर जोर दिया. पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ बनाये रखी और अल्पसंख्यक-महिला वोट बैंक को साधा. कई सीटों पर टीएमसी ने 10,000+ वोटों से आसानी से जीत दर्ज की. हालांकि, नंदीग्राम में ममता बनर्जी खुद चुनाव हार गयीं (भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से), लेकिन कुल मिलाकर पार्टी की रणनीति कामयाब रही.
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बीजेपी के प्रदर्शन में सुधार, लेकिन लक्ष्य अधूरा
बीजेपी ने वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में संगठन का तेजी से विस्तार किया. पार्टी ने उत्तर बंगाल, सीमावर्ती इलाकों और कुछ शहरी क्षेत्रों में मजबूत आधार बनाया. वोट शेयर में 2016 से 30 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया, लेकिन टीएमसी की जमीनी ताकत और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ के आगे बीजेपी टिक न सकी. कई बड़े चेहरे चुनाव हार गये. पार्टी बहुमत के लिए जरूरी 147 सीटें जीतने से बहुत दूर रही. हालांकि, 77 सीटें जीतकर उसने बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल किया.
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36 सीटों पर जीत-हार का अंतर 5 प्रतिशत से भी कम
उत्तर बंगाल में बीजेपी ने कई सीटें जीतीं, जबकि दक्षिण बंगाल में टीएमसी का दबदबा कायम रहा. करीब 36 सीटों पर जीत और हार का अंतर 5 प्रतिशत से भी कम था. कुल मिलाकर 200 से अधिक सीटों पर टीएमसी ने बड़ी जीत दर्ज की. बीजेपी ने कुछ क्षेत्रों में सत्तारूढ़ दल को मजबूत चुनौती दी.
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2021 vs 2026 के संकेत
वर्ष 2021 में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की 213 सीटों पर जीत ने ममता बनर्जी को बंगाल में मजबूत बनाया, लेकिन बीजेपी ने 77 सीटें जीतकर संदेश दिया कि वर्ष 2026 का चुनाव ममता दीदी के लिए बहुत आसान नहीं होने वाला है. बीजेपी का 38 प्रतिशत का वोट बैंक राज्य में उसका बड़ा आधार है. 2026 में एंटी-इनकम्बेंसी, युवा बेरोजगारी और नये मुद्दों से यह अंतर कम या ज्यादा हो सकता है. वर्ष 2021 की जीत टीएमसी की ताकत दिखाती है, तो बीजेपी का उभार बताता है कि बंगाल अब दो-ध्रुव में बंट चुका है. हालांकि, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को, जिनका 2021 में खाता भी नहीं खुला था, उन्हें इस बार पूरी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
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