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सरकारी स्कूलों में इस बार पहले असेसमेंट, फिर शुरू होगी पढ़ाई झारखंड के सरकारी स्कूलों में इस बार नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत पारंपरिक तरीके से नहीं होगी। पहले छात्रों का शैक्षणिक आकलन (Assessment) होगा, उसके बाद ही नियमित पढ़ाई शुरू होगी। इसके तहत पहली से 12वीं कक्षा तक के करीब 45 लाख छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक स्थिति जाँची जाएगी। इसके बाद दो माह तक छात्रों को उनके स्तर के अनुसार विशेष शिक्षा दी जाएगी। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने इसकी गाइडलाइन जारी कर दी है। राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने ‘सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ समेत सभी जिलों को निर्देश दिया है कि 4 अप्रैल तक सभी छात्रों का असेसमेंट पूरा कर लिया जाए। इसके बाद छात्रों को A, B, C और D ग्रेड में बांटा जाएगा और फिर ग्रुप बनाकर उनकी पढ़ाई होगी। पिछले साल की तुलना में बदलाव पिछले वर्ष भी आधारभूत कक्षाओं को लेकर निर्देश जारी किए गए थे, परंतु वे सीमित रहे। बेसलाइन टेस्ट की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं थी और ग्रेडिंग प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं हो सकी थी। परिणाम स्वरूप, कक्षाएं पुराने ढर्रे पर ही चलती रहीं। वर्ष 2026 में इसे समयबद्ध और अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है। यह योजना क्यों बनाई गई? एक ही कक्षा में छात्रों के सीखने का स्तर अलग-अलग होता है। शुरुआती कक्षाओं में बुनियादी कमजोरी रह जाने के कारण आगे की पढ़ाई में निरंतर कठिनाई होती है, जिसका असर वार्षिक परीक्षा परिणामों पर भी पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए परिषद ने सत्र की शुरुआत में ही ‘सुधार अभियान’ शुरू करने का निर्णय लिया है। जानिए 2026 का एक्शन प्लान बेसलाइन असेसमेंट: सभी सरकारी स्कूलों में 12वीं तक के बच्चों का असेसमेंट चार ग्रेड्स में होगा। समूह शिक्षा: ग्रेड के आधार पर समूह बनेंगे और हर विषय की एक घंटी (Period) इसी विशेष व्यवस्था के तहत चलेगी। विषयवार मूल्यांकन: हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और उर्दू का अलग-अलग मूल्यांकन होगा। ब्रिज कोर्स: नए नामांकित छात्रों के लिए विशेष ‘ब्रिज कोर्स’ शुरू किया जाएगा। लाभ: कमजोर छात्रों की पहचान कर उनकी भाषा और गणित की बुनियाद मजबूत की जाएगी। कक्षावार दक्षता का आधार (सीखने के मुख्य बिंदु)

