
मुख्य बातें
Mamata Banerjee: कोलकाता: बंगाल पर चौथी बार कब्जा करने के लिए सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की सूची पर मंथन शुरू कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस इस बार एक परिवार से एक ही व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने का प्लान तैयार किया है. ममता बनर्जी उम्मीदवारों के चयन में इस फॉर्मूले का पालन कर सकती है. ऐसे में, इस बात को लेकर भी अटकलें तेज हो रही हैं कि तृणमूल के कई दिग्गज नेताओं के परिवारों में से किसे टिकट मिल सकता है. हालांकि, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सब कुछ तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के अंतिम समय के फैसले पर निर्भर करेगा।
कई प्रभावशाली नेताओं के बच्चे भी राजनीति में
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के कई ऐसे प्रभावशाली नेता हैं, जिनके परिवार में पत्नी के साथ-साथ उनके बेटे-बेटियां राजनीति में सक्रिय हैं. कुछ जगहों पर पति-पत्नी दोनों तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं. सत्ताधारी पार्टी के इन परिवारों में टिकट के कई दावेदार हैं. जिस प्रकार कोलकाता में ऐसे सत्ताधारी नेता हैं, उसी प्रकार जिलों में भी ऐसे ही परिवार हैं. 26वें विधानसभा चुनाव में इन परिवारों में से किसे टिकट मिलेगा, अब इस बारे में अटकलें तेज हो रही हैं. अभिषेक बनर्जी को बार-बार युवाओं के लिए वकालत करते देखा गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ नागरिकों की भी आवश्यकता है. इस स्थिति में कहा जा रहा है कि सत्ताधारी दल टिकट देने के मामले में अधिकतर ‘एक परिवार एक टिकट’ की नीति अपना सकता है. हालांकि, कुछ मामलों में अपवाद भी हो सकते हैं.
कई दंपति भी सदन में मौजूद
कोलकाता में फिरहाद हकीम, अतिन घोष, स्वर्ण कमल साहा और सुप्ति पांडेरा हैं. फिरहाद हकीम कोलकाता नगर निगम के मेयर और कोलकाता पोर्ट के विधायक हैं. उनकी बेटी प्रियदर्शनी हकीम भी तृणमूल के विभिन्न कार्यक्रमों में नजर आती हैं. अतीन घोष कोलकाता नगर निगम के उप महापौर और काशीपुर-बेलगाछिया से विधायक हैं. उनकी बेटी प्रियदर्शनी घोष भी तृणमूल महिला कांग्रेस की नेता हैं. स्वर्ण कमल साहा 2011 से एंटाली के विधायक हैं. उनके बेटे संदीपान साहा कोलकाता नगर निगम के पार्षद हैं. स्वर्ण कमल ने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया है कि वे इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनना चाहते. वे चाहते हैं कि उनके बेटे संदीपान को उम्मीदवार बनाया जाए. रत्ना चटर्जी बेहाला पूर्व से विधायक हैं. उनके पिता दुलाल दास महेशतला से विधायक हैं. दुलाल ने पार्टी को संदेश भेजा है कि वे दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहते.
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बच्चों के लिए छोड़नी होगी सीट
जिले पर नजर डालें तो पाएंगे कि बेचाराम मन्ना और उनकी पत्नी कार्बी मन्ना सत्ताधारी पार्टी के विधायक हैं. बेचाराम सिंगूर से विधायक हैं और उनकी पत्नी हरिपाल से विधायक हैं. वहीं, अखिल गिरी 2011 से पूर्वी मिदनापुर के रामनगर से विधायक हैं. उनके बेटे सुप्रकाश गिरि भी सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं. उदय गुहा कूचबिहार के दिन्हाटा से विधायक हैं. उनके बेटे सायंतन गुहा भी सत्ताधारी पार्टी के नेता हैं और जिला तृणमूल के महासचिव हैं. ऐसे ही अलग-अलग जिलों में सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं के परिवार राजनीति में सक्रिय हैं. वे पार्टी में विभिन्न पदों पर भी आसीन हैं. समय-समय पर इन प्रभावशाली पिताओं के बच्चों को टिकट दिए जाने की अटकलें लगती रहती हैं. इस बार अगर यह प्लान लागू होता तो कई नेताओं को बच्चों के लिए सीट छोड़नी होगी.
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