
मुख्य बातें
West Bengal Chunav: कोलकाता. विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. भाजपा बंगाल में सत्ता पाने की तैयारी में जुटी है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व सख्त निर्देशों के साथ राज्य नेतृत्व को टास्क दे रहा है. राज्य भाजपा को फरवरी तक बूथ स्तर पर अपना जनसंपर्क अभियान पूरा करने का डेटलाइन दे दिया गया है. केंद्रीय नेतृत्व ने शामिक भट्टाचार्य और शुभेंदु अधिकारी जैसे राज्य नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रचार शोर के शोर के बदले खामोशी से वोटरों का लामबंद करने का काम हो. न केवल राज्य नेतृत्व, बल्कि विधायकों को भी प्रतिदिन कम से कम 5 बूथों पर जाकर जनसंपर्क करने का निर्देश दिया गया है. बूथ आधारित सभी कार्यक्रम फरवरी के अंत से पहले पूरा होना है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यह रणनीति मुख्य रूप से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए है. शीर्ष नेतृत्व ने प्लान बंगाल के तहत भाजपा नेताओं को संदेह दिया है- हमें जनसंपर्क सभाएं आयोजित करनी होंगी. इन सबका एक ही लक्ष्य है, और वह है चुनाव.
माइक लेकर चिल्लाने के बदले घर-घर जाकर करें बात
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अब तक नहीं हुई है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर माहौल तैयार हो चुका है. चाहे सत्ताधारी दल हो या विपक्षी दल, हर पार्टी मतदान से पहले माहौल का जायजा ले रही है. कुछ लोगों के सामने कई मुद्दे हैं, कुछ अभी भी अपनी स्थिति का आकलन कर रहे हैं. कहीं-कहीं गठबंधनों का जाल बिछा हुआ है. कुल मिलाकर, मतदान का समय आ गया है. इस माहौल में बंगाल भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल के विधायकों को एक संदेश दिया. अभी माध्यमिक परीक्षाएं चल रही हैं. इनके समाप्त होने के बाद उच्च माध्यमिक परीक्षाएं शुरू होंगी. इसलिए, इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह समय प्रचार के शो का नहीं है. यह समय माइक लेकर चिल्लाने और जनसंपर्क करने का नहीं है, बल्कि घर-घर जाकर लोगों से घनिष्ठ संपर्क स्थापित करने का है.
घर के आंगन में करें बैठक, मंदिर में झुकाएं माथा
बंगाल भाजपा इस प्रक्रिया, या यूं कहें कि इस समय का, एक उपकरण के रूप में उपयोग करने के लिए तैयार है. बंगाल में भाजपा विधायकों के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बूथ आधारित जनसंपर्क कार्य में लग जाये. चौराहे या सामुदायिक भवनों में बैठकें न करें, बल्कि घरों के आगन या घरों के बीच बैठकें करें. पांचों बूथ क्षेत्रों में घर-घर जाकर प्रचार करना होगा. आपको लोगों के साथ आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने होंगे. आपको मंदिरों में जाकर दर्शन करने होंगे. आपको पार्टी के निचले स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ संबंध बनाए रखने होंगे. आपको कार्यकर्ताओं के घरों में जाकर उन्हें भोजन देना होगा. इसके अलावा, हमें केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क बनाए रखना होगा. हमें यह जानना होगा कि क्या उन्हें कोई कठिनाई हो रही है.
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