बंगाल सरकार का ग्रुप बी की लिस्ट में छेड़छाड़ का आरोप, SIR पर चुनाव आयोग से बढ़ा विवाद

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बंगाल सरकार का ग्रुप बी की लिस्ट में छेड़छाड़ का आरोप, SIR पर चुनाव आयोग से बढ़ा विवाद

SIR in Bengal : कोलकाता: एसआईआर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है. अंतिम चरण में भी एसआईआर पर विवाद कम नहीं हो रहा है. इस बार राज्य सरकार ने शिकायत की है कि चुनाव आयोग को सौंपे गए राज्य के ग्रुप-बी अधिकारियों के नामों के डेटाबेस में हेरफेर करने का प्रयास किया जा रहा है. राज्य सरकार ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग को एसआईआर के कार्य हेतु 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों के नाम सौंपे हैं. मंगलवार को नबन्ना की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इन नामों के डेटाबेस में गड़बड़ी पाई गई है.

जानबूझ कर हो रहा सूची से छेड़छाड़

अधिसूचना में कहा गया है- राज्य सरकार के संज्ञान में आया है कि कुछ निहित स्वार्थों ने जानबूझकर डेटाबेस में बदलाव किया जा रहा है. चुनाव आयोग को प्रस्तुत की गई जानकारी के साथ छेड़छाड़ की है. ग्रुप-बी अधिकारियों के नामों के डेटाबेस को विकृत करने का प्रयास किया जा रहा है. पश्चिम बंगाल सरकार स्पष्ट रूप से कहती है कि चुनाव आयोग को प्रस्तुत की गई ग्रुप-बी कर्मचारियों की सूची पश्चिम बंगाल सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में निर्धारित मौजूदा वेतनमान मानदंडों का पूरी तरह से पालन करते हुए तैयार की गई है.

सूची पूरी तरह प्रामाणिक

अधिसूचना में कहा गया है कि यह सूची 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद प्रस्तुत की गई थी. इसमें आगे कहा गया है- राज्य सरकार के कर्मचारियों का ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ और ‘डी’ समूहों में वर्गीकरण स्पष्ट रूप से परिभाषित है और मौजूदा नियमों के साथ पूरी तरह से सुसंगत है. ग्रुप ‘बी’ के कर्मचारियों की सूची निर्धारित नियमों और मानदंडों के अनुसार अत्यंत सावधानी और पारदर्शिता के साथ तैयार की गई और चुनाव आयोग को प्रस्तुत की गई. इसमें कोई विचलन या अनियमितता नहीं थी. जो सूची दी गयी है वो पूरी तरह प्रामाणिक है.

अनियमितता का आरोप निराधार

नबन्ना ने एक अधिसूचना में नाम डेटाबेस को विकृत करने के प्रयासों का आरोप लगाया और कहा कि इसमें अनियमितताएं हुई हैं या धांधली के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और वास्तविकता से बिल्कुल अलग हैं. नबन्ना की इस घोषणा को लेकर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं. ‘कुछ निहित स्वार्थों’ की बात कहकर नबन्ना ने किसे निशाना बनाया, यह चर्चा का विषय बना हुआ है. विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि यह अधिसूचना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य और आयोग अभी भी एसआईआर विवाद को अंतिम चरण तक ले जाने के लिए प्रयासरत हैं.

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