नीतीश कुमार (निदेशक, न्यू सनशाइन पब्लिक स्कूल): तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी है। स्क्रीन टाइम से बचाते हुए व्यावहारिक शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। नयन कुमार सिंह (निदेशक, टॉपर पॉइंट स्कूल): अभिभावकों को बच्चों के प्रति सक्रिय होना चाहिए। बच्चों को सजा के तौर पर अंदर ही खड़ा करें ताकि पढ़ाई बाधित न हो। पंकज कुमार सिंह (शिक्षक, हैप्पी स्कूल): बच्चे बीटीएस आर्मी और कोरियन ग्रुप्स के प्रति आकर्षित हो रहे हैं, जो उन्हें गलत दिशा में ले जा सकते हैं। अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए। आदित्य नमन (शिक्षक, बिड़ला ओपेन माइंड्स स्कूल): नैतिक शिक्षा और संस्कारों को स्कूल के पाठ्यक्रम का एक अहम और अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उमाशंकर शर्मा (निदेशक, इंग्लिश टीचिंग): बच्चों पर गलत चीजों का असर जल्दी पड़ता है । अंग्रेजी के साथ-साथ मातृभाषा भी सिखाएं ताकि वे अपनी संस्कृति से जुड़े। श्रद्धा साबू (निदेशक, कैनवास इंटरनेशनल प्री स्कूल): लक्ष्य तय करने से पहले बच्चों को अच्छा नागरिक बनाएं। ऑल राउंडर बनाने के लिए माताओं को ध्यान देना चाहिए। ई. शील प्रियम (निदेशक सह फाउंडर, प्रियम ग्लोबल स्कूल): हर बच्चे की क्षमता अलग होती है। इसलिए उसकी रुचि और क्षमता के अनुसार मार्गदर्शन मिलना चाहिए। विवेक चटर्जी (प्रिंसिपल, हैप्पी वैली स्कूल): बच्चे की कमियों के लिए अभिभावक और शिक्षक एक-दूसरे पर दोष मढ़ने के बजाय मिलकर उन्हें दूर करने का प्रयास करें। निलांजन मुखर्जी (वाइस प्रिंसिपल, टाइनी टॉट्स नन्हें-मुन्ने स्कूल): बच्चों का अन्य गतिविधियों पर ध्यान देना ठीक है, लेकिन 12वीं तक की बुनियादी पढ़ाई जरूरी है। दिनेश प्रसाद मंडल (निदेशक, पीके विद्या निकेतन): बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अन्य पाठ्येतर गतिविधियों से भी जोड़ा जाए। इंद्रजीत कुमार (निदेशक, टीए इंटरनेशनल स्कूल): बच्चों के कौशल को विकसित करना चाहिए। शिक्षकों को भी स्कूल की गतिविधियों में बच्चों के साथ आना चाहिए। ई. अंशु सिंह (निदेशक, टेक्नो मिशन इंटरनेशनल स्कूल): पढ़ाई के साथ खेल और रचनात्मक गतिविधियां अनिवार्य हैं। चुनौतियों को पहचानकर संवाद करना चाहिए। सिटी िरपोर्टर| भागलपुर बदलते शैक्षणिक परिवेश में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना ही नहीं है, बल्कि उनका सर्वांगीण विकास बड़ी जरूरत है। इसी विषय को लेकर दैनिक भास्कर कार्यालय में शहर के प्रमुख निजी स्कूलों के शिक्षकों और निदेशकों के साथ विशेष संवाद हुआ। मुख्य उद्देश्य आधुनिक दौर की चुनौतियों के बीच बच्चों के बौद्धिक, मानसिक व भावनात्मक और सामाजिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाना था। चर्चा में जोर दिया गया कि शिक्षा को केवल अंकों तक सीमित न रखकर बच्चों की नेतृत्व क्षमता व नैतिक मूल्यों को भी विकसित किया जाना चाहिए। दैनिक भास्कर भागलपुर के यूनिट हेड अवधेश शर्मा थे।
बदलते शैक्षणिक परिवेश में किताबी ज्ञान ही नहीं, सर्वांगीण विकास जरूरी
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