बरवाडीह जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज मुकम्मल, देश में अमन-चैन के लिए मांगी दुआ

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बरवाडीह| पवित्र रमजान माह के दौरान बरवाडीह स्थित जामा मस्जिद में तरावीह की नमाज शुक्रवार को मुकम्मल हो गई। पूरे रमजान महीने भर बड़ी संख्या में नमाजी मस्जिद पहुंचकर तरावीह की नमाज में शामिल होते रहे। तरावीह मुकम्मल होने के अवसर पर मस्जिद का माहौल पूरी तरह रूहानी बना रहा। इस दौरान हाफिज जनाब रहमत साहब ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज में कुरआन शरीफ की तिलावत करते हुए तरावीह की नमाज अदा कराई। उनकी खूबसूरत तिलावत से मस्जिद का माहौल आध्यात्मिकता से भर गया और नमाजियों ने बड़ी श्रद्धा के साथ इबादत में हिस्सा लिया। मौके पर जामा मस्जिद कमेटी के सदर जनाब नासीर खान ने हाफिज रहमत साहब ने कहा कि रमजान का महीना रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना होता है। इस पवित्र माह में कुरआन की तिलावत और इबादत का विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि हाफिज रहमत साहब ने पूरे रमजान माह में पूरी लगन और खूबसूरती के साथ तरावीह की नमाज अदा कराई। भास्कर न्यूज | लातेहार माह-ए-रमजान के तीसरे जुमे की नमाज शुक्रवार को जिलेभर में पूरी अकीदत व एहतराम से अदा की गई। इस पवित्र मौके पर लातेहार, महुआडांड, बालूमाथ, हेरहंज, मनिका समेत विभिन्न मस्जिदों में नमाजियों का सैलाब उमड़ पड़ा। नमाज के बाद बारगाहे-इलाही में हाथ फैलाकर देश और प्रदेश की तरक्की, खुशहाली, आपसी भाईचारे और कौम की उन्नति के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। महुआडांड़ जामा मस्जिद में मौलाना रेयाज ने जुमे की नमाज मुकम्मल कराई। नमाज से पूर्व तकरीर करते हुए उन्होंने रमजान की विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “रोजा केवल भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि यह एक-दूसरे के दुख-दर्द को समझने और इंसानियत की सेवा करने की प्रेरणा देता है। यदि संपन्न मुसलमान इस महीने में अपने माल की जकात (दान) ईमानदारी से निकालें, तो समाज का कोई भी गरीब भूखा नहीं रहेगा। मौलाना ने बताया कि 10 मार्च से रमजान का तीसरा और आखिरी अशरा (अंतिम 10 दिन) शुरू हो रहा है।

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