बिहार के 35 लाख बच्चे खतरे में, सम्राट बोले-कानून बनाएंगे:आपका बच्चा कितना टाइम मोबाइल देखेगा यह तय करेगी नीतीश सरकार, क्यों ला रही कानून जानिए

Date:


बेटे-बेटी को ऑनलाइन गेम खेलने की लत लग गई है। स्कूल से आते ही मोबाइल में लग जाते हैं। मोबाइल नहीं मिलने पर खाना नहीं खाते। टीवी देखते हैं। इसका असर अब उनकी पढ़ाई, व्यवहार और सेहत पर दिखाई दे रहा है। पेरेंट्स की इस समस्या और मोबाइल स्क्रीन में सिमटते बचपन के खतरे को भांपते हुए बिहार सरकार बच्चों की स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए पॉलिसी बनाने जा रही है। 23 फरवरी को इसकी घोषणा विधानसभा में गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने की। बच्चों की स्क्रीन टाइम को लेकर नियम बनाने की जरूरत क्यों महसूस की गई। इसका बच्चों के हेल्थ पर क्या असर पड़ता है। बिहार क्या पहला राज्य है, जो कानून बनाने जा रहा है। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। सवाल-1ः बिहार के बच्चों की स्क्रीन टाइम पर पॉलिसी बनाने की चर्चा कैसे शुरू हुई? जवाबः 23 फरवरी को JDU विधायक समृद्ध वर्मा ने विधानसभा में कहा- ‘हालिया रिसर्च और WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों का स्क्रीन टाइम खतरनाक लेबल तक बढ़ चुका है। इसका सीधा असर बच्चों के मानसिक विकास, व्यवहार और पढ़ाई पर पड़ रहा है।’ सवाल-2ः बिहार में इस कानून की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है? जवाबः इसे आप 2024 में आई राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की सर्वे रिपोर्ट से समझिए… सवाल-3ः ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? जवाबः अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलेसेंट साइकिएट्री के मुताबिक, बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम आने वाले समय में बड़ी समस्या के रूप में सामने आ सकता है। इससे कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इंडियन जर्नल ऑफ ऑफथेल्मोलॉजी में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, ज्यादा स्क्रीन देखने के कारण बच्चों में ड्राई आंखों की समस्या बढ़ रही है। सवाल-4ः भारत के किस-किस राज्य में ऐसा कानून है? जवाबः फिलहाल देश के किसी राज्य में बच्चों के स्क्रीन टाइम को कम करने के लिए कोई पूर्ण रूप से कानून नहीं है। ज्यादातर राज्य विचार-विमर्श कर रहे हैं। रिसर्च कर रहे हैं। कुछ राज्यों में कानून प्रस्तावित है तो कुछ तैयारी में हैं। अगर बिहार ऐसा कानून लाता है तो वह देश का पहला राज्य होगा। इस मुद्दे पर देश के बाकी राज्यों में क्या हो रहा सवाल-5ः बच्चों की स्क्रीन टाइम कितनी होनी चाहिए और कम करने के लिए क्या करें? जवाबः विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकेट्री (AACAP) ने बच्चों के लिए स्क्रीन के इस्तेमाल की टाइमलाइन जारी की है। दुनिया के ज्यादातर स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों के लिए यही टाइमलाइन रिकमेंड करते हैं। स्क्रीन टाइम कम करने के लिए क्या करें अगर बच्चे का स्क्रीन टाइम ज्यादा है तो एक दिन में ऐसा नहीं होगा कि वह फोन चलाना बंद कर देगा। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चे से इस बारे में बात करें कि उसे सोशल मीडिया और ऑनलाइन दुनिया को किस तरह बरतना चाहिए। उसके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है। छोटे बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए यह कुछ नियम और दिशा-निर्देश उपयोगी हो सकते हैं…

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Richard Pybus appointed Afghanistan head coach, set to begin tenure with Sri Lanka white-ball series

The Afghanistan Cricket Board (ACB) has appointed England-born Richard...

Edwin Lutyens of Britain might be alien, but Lutyens of Delhi is Indian

Whenever I meet a bureaucrat from Delhi who works...

नफरत के शोर में प्रेम की कविता लिखना ही बड़ा प्रतिकार : पंकज मित्र

प्रेस क्लब रांची में ‘शब्दकार’ साहित्यिक समूह की ओर...
Join Us WhatsApp