
Bihar News: बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली नेपाल से आने वाली नदियों पर अब आसमान से निगरानी की तैयारी है. राज्य सरकार ने बाढ़ से होने वाले भारी नुकसान को कम करने के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का फैसला किया है. नई योजना के तहत नेपाल सीमा से सटे जिलों में प्रवेश करने वाली नदियों और जलस्रोतों की निगरानी सैटेलाइट के जरिए की जाएगी, ताकि समय रहते खतरे का अनुमान लगाकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके.
जल संसाधन विभाग की इस कार्ययोजना में चंपारण से लेकर किशनगंज तक के सीमावर्ती इलाके शामिल किए गए हैं. सरकार का मानना है कि अंतरिक्ष से मिलने वाला डेटा बाढ़ प्रबंधन को पूरी तरह बदल सकता है और लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में मदद करेगा.
अंतरिक्ष से मिलेगा जलस्तर का सटीक संकेत
इसरो के रिमोट सेंसिंग सेंटर से मिलेगा पल-पल का अपडेट इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए बिहार सरकार ने ‘नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर’ (NRSC) के साथ हाथ मिलाया है. करीब 6960 वर्ग किलोमीटर के विशाल दायरे को इस निगरानी तंत्र में शामिल किया गया है.
इसके जरिए कोसी बेसिन समेत उन तमाम छोटी-बड़ी नदियों का डेटा इकट्ठा किया जाएगा, जो नेपाल से बिहार में प्रवेश करती हैं. सैटेलाइट तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन इलाकों का भी सटीक पूर्वानुमान दे सकेगी, जहां वर्तमान में कोई ‘गेज’ (जलस्तर मापने वाला यंत्र) उपलब्ध नहीं है.
तटबंध विहीन इलाकों पर रहेगा खास ध्यान
बिहार की एक बड़ी समस्या यह रही है कि कई नदियों पर या तो तटबंध नहीं हैं या वे अभी निर्माणाधीन हैं. ऐसे में अचानक आने वाली बाढ़ से निपटना प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता. जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार अब आधुनिक तकनीकों के सहारे दीर्घकालीन और अल्पकालीन योजनाओं पर काम कर रही है.
सैटेलाइट डेटा के माध्यम से उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां तटबंध नहीं हैं, जिससे बाढ़ आने से पहले ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा.
फ्लैश बाढ़ की समस्या पर मिलेगी राहत
नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश होने पर अचानक जलस्तर बढ़ जाता है, जिससे सीमावर्ती जिलों में फ्लैश बाढ़ की स्थिति बनती है. नई निगरानी प्रणाली से प्रशासन को हर उस जलस्रोत की जानकारी मिल सकेगी जो नेपाल से बिहार में प्रवेश कर रहा है.
इससे जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी और बाढ़ नियंत्रण की मजबूत कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी. यह पहल भविष्य में बिहार को बाढ़ की त्रासदी से राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
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