
Rajya Sabha Chunav 2026: बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने अब एक नया और रोमांचक मोड़ ले लिया है. अब तक माना जा रहा था कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के पांच विधायक ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाएंगे, लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान के बयान ने पूरी बिसात ही पलट दी है.
विधानसभा परिसर में मीडिया से बात करते हुए ईमान ने साफ कर दिया कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन देने के बजाय खुद अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी. इस एलान के बाद बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या ओवैसी का यह दांव विपक्ष के वोटों में सेंध लगाएगा या एनडीए के लिए राह और आसान कर देगा.
समर्थन नहीं, प्रतिनिधित्व की राजनीति
अख्तरुल ईमान ने मीडिया से बातचीत में कहा- आप ये बात नहीं बोल सकते है कि राजद हमारा साथ दे, इनलोगों के प्रतिनिधि है राज्यसभा में हमारा कोई नहीं है, आपलोग फिजा बनाइये सबलोग हमारे आदमी को राज्यसभा भेजेराज्यसभा में कई दलों का प्रतिनिधित्व है, लेकिन AIMIM का कोई सदस्य नहीं है. ऐसे में पार्टी अब अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहती है.
उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पार्टी दबे-कुचले वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आवाज को संसद तक पहुंचाने के लिए चुनाव मैदान में उतर सकती है.
इस बयान को AIMIM के राजनीतिक विस्तार की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, खासकर उन राज्यों में जहां पार्टी का आधार धीरे-धीरे बढ़ रहा है.
ओवैसी फैक्टर से बढ़ा चुनाव का रोमांच
बिहार विधानसभा में AIMIM के विधायकों की संख्या भले सीमित हो, लेकिन राज्यसभा चुनाव में हर वोट अहम होता है. यदि पार्टी अपना उम्मीदवार उतारती है, तो इससे विपक्षी दलों, खासकर RJD और सहयोगियों की रणनीति प्रभावित हो सकती है. इससे वोटों का बंटवारा भी संभव है, जो चुनाव परिणाम पर असर डाल सकता है.
राज्यसभा चुनाव आम तौर पर संख्या बल का खेल माना जाता है, लेकिन कई बार छोटे दलों की भूमिका निर्णायक बन जाती है. AIMIM के इस एलान ने साफ कर दिया है कि बिहार में इस बार चुनाव सिर्फ सीटों का नहीं, बल्कि राजनीतिक पहचान और प्रभाव बढ़ाने की लड़ाई भी होगा.
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