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सिटी एंकर बोकारो जिला देश की औद्योगिक नगरी के रूप में अपना स्थान रखता है। जहां पर झारखंड का सबसे बड़ा रजिस्टर्ड मजदूरों का जत्था है। पर आज तक यहां के मजदूरों के इलाज के लिए एक ईएसआईसी अस्पताल तक नहीं बन पाया है। आज यहां के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण बोकारो अपनी पहचान ही खोता जा रहा है। बोकारो जिला में लगभग एक लाख 11 हजार रजिस्टर्ड मजदूर हैं। पर आज तक इन मजदूरों या इनके परिजनों के इलाज के लिए यहां मात्र एक क्लिनिक है, जहां सर्दी-बुखार जैसी बीमारियों का इलाज होता है। ईएसआईसी के रजिस्टर्ड मजदूरों को इलाज के लिए सेक्टर-4 के क्लिनिक में जाना पड़ता है। जहां पर प्रतिदिन 160 से 170 मरीज आते है। इनमें से 60-65 ऐसे मरीज होते हैं। जिनको अस्पताल के आभाव में बाहर के निजी या ईएसआईसी अस्पताल में रेफर करना पड़ रहा है। यही नहीं बोकारो के ईएसआईसी क्लिनिक में प्रतिदिन 160 से 170 मरीज इलाज कराने आते हैं, लेकिन मात्र एक ही चिकित्सक हैं। यहां पर ईएसआईसी अस्पताल बनना जरूरी अस्पताल के लिए पांच एकड़ जमीन चिह्नित, पर रेट को लेकर मतभेद मरीज की जांच करते चिकित्सक। बोकारो शहर के बीचोंबीच उकरीद मोड़ के समीप 05 एकड़ जमीन चिह्नित कर ईएसआईसी अस्पताल के लिए दी गई है। पर इस जमीन की कीमत को लेकर सेल (बीएसएल) और ईएसआईसी के बीच मतभेद है। इसके समाधान के लिए जल्द ही दोनों विभाग के अधिकारियों की बोकारो में बैठक होने वाली है। जिसमें जमीन का रेट फाइल होने की संभावना है, अगर जमीन के रेट का समाधान हुआ, तो ईएसआईसी अस्पताल का निर्माण शुरू हो जाएगा। इसके लिए तेजी से पहल शुरू हो चुकी है। गौरतलब है कि यहां के जनप्रतिनिधियों भी उदासीन हैं। वर्षों से सांसद-विधायक मामले को उठाते रहे हैं, लेकिन इसके लिए कभी गंभीर नहीं दिखे। यही वजह है कि बोकारो में ईएसआईसी अस्पताल की अभी तक नींव नहीं पड़ी। इसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। जबकि ईएसआईसी से रजिस्टर्ड मजदूर करोड़ों रुपए प्रीमियम भरते हैं।
बोकारो में 1.11 लाख रजिस्टर्ड मजदूर, पर ईएसआईसी हॉस्पिटल नहीं
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