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मधुबनी जिले की आंगनवाड़ी महिला पर्यवेक्षकों ने शनिवार को समाहरणालय के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने विभागीय निर्देशों की अनदेखी, अतिरिक्त कार्यभार, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए। महिला पर्यवेक्षकों के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन का निर्धारित समय सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक है। हालांकि, उन्हें शाम 5:00 बजे तक कार्यालय में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। इससे उन्हें अतिरिक्त घंटे सेवा देनी पड़ती है, जिससे मानसिक दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिला स्तर पर हर महीने 100 अंकों की मूल्यांकन परीक्षा ली जाती है। इसमें कम अंक आने पर नौकरी समाप्त होने या मानदेय में कटौती का भय बना रहता है, जिससे महिला कर्मियों पर अनावश्यक मानसिक दबाव पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मातृत्व अवकाश, आकस्मिक अवकाश और अर्जित अवकाश जैसे वैधानिक अधिकार लंबित रखे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अतिरिक्त, उनकी सेवा पुस्तिकाएं अब तक नहीं खोली गई हैं, जिससे उनकी सेवा संबंधी प्रक्रिया अधूरी है। महिला पर्यवेक्षकों ने बताया कि रविवार और अन्य छुट्टियों के दिनों में भी उनसे सुबह 10:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ड्यूटी ली जाती है। इसके बदले उन्हें न तो क्षतिपूर्ति अवकाश मिलता है और न ही अतिरिक्त मानदेय। परीक्षा ड्यूटी के दौरान भी उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं दिया जाता, जबकि अन्य कर्मियों को इसका भुगतान किया जाता है। ईपीएफ (कर्मचारी भविष्य निधि) को लेकर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। धरना प्रदर्शन कर रही महिला पर्यवेक्षकों ने प्रशासन से अपनी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है। उनकी मांगों में कार्य के निर्धारित समय का पालन, अवकाश और मानदेय से संबंधित लंबित मामलों का निपटारा तथा ईपीएफ की राशि तत्काल जमा कराना शामिल है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आगे उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगी।


