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पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) के डॉक्टरों ने एक महिला के पेट से 15.5 किलोग्राम का विशाल ओवेरियन ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला है। यह जटिल सर्जरी अस्पताल के लेबर रूम में सीमित संसाधनों के बीच की गई, जो चिकित्सा क्षेत्र में पीएमसीएच की क्षमता को दर्शाता है। मरीज लंबे समय से पेट में सूजन, दर्द और भारीपन की समस्या से पीड़ित थी। शुरुआत में उसने इसे सामान्य परेशानी समझा, लेकिन धीरे-धीरे उसका पेट असामान्य रूप से बढ़ने लगा। इसके कारण उसे चलने-फिरने और दैनिक कार्यों में भी कठिनाई होने लगी थी। जब परिजन उसे इलाज के लिए पीएमसीएच लाए, तो जांच के बाद डॉक्टरों ने पाया कि महिला के पेट में एक बहुत बड़ा ओवेरियन ट्यूमर विकसित हो गया था। यह ट्यूमर आसपास के अंगों पर दबाव डाल रहा था, जिससे स्थिति गंभीर हो गई थी। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया। इस सर्जरी की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसे अस्पताल के लेबर रूम में अंजाम दिया गया। इतनी बड़ी सर्जरी ऑपरेशन थिएटर में की जाती है, लेकिन डॉक्टरों ने उपलब्ध संसाधनों के साथ इस चुनौती को स्वीकार किया। ऑपरेशन का नेतृत्व वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रो. मीनू शरण ने किया। उनकी टीम में ऑन्को सर्जन डॉ. नवीन, डॉ. नीना अग्रवाल, डॉ. अंजली और डॉ. माधुरी शामिल थीं। सभी डॉक्टरों ने मिलकर कई घंटों तक चली इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया। सर्जरी के दौरान आई कई चुनौतियां डॉक्टरों के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद जटिल था। ट्यूमर का आकार इतना बड़ा था कि उसे निकालते समय आसपास के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ था। साथ ही, ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित रखना भी एक बड़ी चुनौती थी। टीम ने अपनी विशेषज्ञता और अनुभव का परिचय देते हुए हर चुनौती का सामना किया। सटीक योजना और बेहतर समन्वय के कारण बिना किसी बड़ी जटिलता के ट्यूमर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। दुर्लभ मामलों में ही दिखता है इतना बड़ा ट्यूमर चिकित्सकों का कहना है कि 15.5 किलोग्राम का ओवेरियन ट्यूमर बेहद दुर्लभ होता है। आमतौर पर ऐसे ट्यूमर धीरे-धीरे विकसित होते हैं और शुरुआती लक्षण सामान्य लगने के कारण मरीज इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि समय रहते जांच और इलाज नहीं कराया जाए तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। इस मामले में भी अगर थोड़ी और देरी होती, तो मरीज की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। ऑपरेशन के बाद स्थिर है मरीज की हालत सफल सर्जरी के बाद फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है और लगातार उसकी सेहत पर नजर रखी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले दिनों में उसकी स्थिति और बेहतर होने की उम्मीद है। टीम वर्क और समर्पण की मिसाल अस्पताल प्रशासन ने इस सफलता को टीम वर्क और डॉक्टरों के समर्पण का परिणाम बताया है। सीमित संसाधनों के बावजूद इतनी बड़ी और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पीएमसीएच की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी उच्च स्तर की चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। जरूरत सिर्फ समय पर पहचान और सही इलाज की होती है। यह ऑपरेशन न केवल एक महिला के लिए नई जिंदगी लेकर आया, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गया है।


