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मुजफ्फरपुर में सोमवार को व्यावसायिक ड्राइवरों ने अपनी सुरक्षा और भविष्य की अनदेखी के विरोध में जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। ‘ड्राइवर एसोसिएशन’ के बैनर तले सैकड़ों चालकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और जिलाधिकारी (DM) को 10 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। ड्राइवरों का कहना है कि वे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, फिर भी उपेक्षा और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में सड़क दुर्घटना में ड्राइवर की मौत को ‘आपदा’ की श्रेणी में शामिल करना शामिल है। उन्होंने पीड़ित परिवार को 20 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। गंभीर रूप से अपंग होने पर 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और सरकारी अस्पतालों में ड्राइवरों के लिए अलग से आईसीयू बेड आरक्षित करने की मांग भी उठाई गई है। ड्राइवरों के लिए पेंशन योजना लागू हो ड्राइवर एसोसिएशन ने 60 वर्ष की आयु के बाद ड्राइवरों के लिए सम्मानजनक पेंशन योजना लागू करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, ड्राइवरों के बच्चों को उच्च शिक्षा में विशेष आरक्षण और समाज में उन्हें ‘द्वितीय श्रेणी सैनिक’ के समान दर्जा देने की बात भी कही गई। संगठन का तर्क है कि जवान और ड्राइवर दोनों ही अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सेवा करते हैं। कार्यस्थल पर हिंसा रोकने के लिए ड्राइवरों ने सख्त ‘सुरक्षा कानून’ बनाने की मांग की है, ताकि उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार पर रोक लग सके। ज्ञापन में व्यावसायिक वाहनों में आगे-पीछे सीसीटीवी कैमरे लगाने और 1 सितंबर को आधिकारिक तौर पर ‘ड्राइवर दिवस’ घोषित कर छुट्टी देने का प्रस्ताव भी शामिल है। हम अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार इन मांगों पर जल्द संज्ञान नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा, हम केवल अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। जब तक ड्राइवर आयोग और ड्राइवर वेलफेयर फंड का गठन नहीं होता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।” ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय चालक और संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मुजफ्फरपुर में ड्राइवरों का प्रदर्शन, डीएम को ज्ञापन:1 सितंबर को 'ड्राइवर दिवस' घोषित करने की मांग, मौत पर 20 लाख मुआवजे की डिमांड
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