
Bihar News: बिहार की उच्च शिक्षा प्रणाली को हाई-टेक बनाने की दिशा में नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब राज्य के यूनिवर्सिटीयों की परीक्षाओं में कॉपियों की चेकिंग पेन-कागज के बजाय ‘डिजिटल मोड’ में करने की तैयारी है. शिक्षा विभाग ने इस संदर्भ में एक ठोस प्रस्ताव राजभवन को भेजा है, जहां राज्यपाल की अंतिम अनुमति का इंतजार है.
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने विधान परिषद में इस योजना का खुलासा करते हुए बताया कि विज्ञान और तकनीकी संस्थानों के सफल मॉडल को अब यूनिवर्सिटीयों में भी लागू किया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल मैट्रिक और इंटर की परीक्षाओं में यह व्यवस्था लागू करने की कोई योजना नहीं है.
डिजिटल चेंकिग से बदलेगी परीक्षा व्यवस्था
सदन में चर्चा के दौरान शिक्षा मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बिहार की बदलती तस्वीर पेश की. उन्होंने बताया कि साल 2005 से पहले बिहार का शिक्षा बजट महज 4400 करोड़ रुपये हुआ करता था, जो अब 2026-27 के लिए बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है.
बिहार अब देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जो अपने कुल वार्षिक बजट का रिकॉर्ड 20 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ शिक्षा पर खर्च कर रहा है.
AI आधारित शिक्षा की तैयारी शुरू
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बिहार सरकार अब ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) पर दांव लगा रही है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाला समय एआई का है, इसलिए इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में AI आधारित शिक्षा को अनिवार्य सिलेबस का हिस्सा बनाया जाएगा.
इसके लिए जनवरी में ‘नेसकॉम’ (NASSCOM) के साथ एक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं. इस पहल का मुख्य उद्देश्य बिहार के छात्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना और उन्हें नई तकनीक से लैस करना है.
सरकार ने दावा किया कि 2005 के पहले जहां शिक्षा बजट लगभग 4400 करोड़ रुपये था, वहीं अब 2026-27 में यह बढ़कर 70 हजार करोड़ रुपये हो गया है. यह कुल बजट का लगभग 20 प्रतिशत है. मंत्री के अनुसार शिक्षा पर इतनी बड़ी हिस्सेदारी खर्च करने वाला Bihar देश का पहला राज्य बन गया है.
Also Read: बिहार के किसानों के खाते में 100 करोड़ से ज्यादा की राशि ट्रांसफर, फटाफट चेक करें बैलेंस
The post यूनिवर्सिटियों के कॉपियों की होगी डिजिटल चेकिंग, AI आधारित शिक्षा पर सरकार का जोर appeared first on Prabhat Khabar.




