झारखंड में टाटा एक बड़े निवेश की तैयारी में है। औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और टाटा समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। बताया जा रहा है कि टाटा समूह ने राज्य में ज्ञान आधारित उद्योगों, स्टील क्षेत्र में नई तकनीक और हाइड्रोजन ट्रकों के निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की सहमति जताई है। समूह ने स्टील सेक्टर में रिसर्च के लिए 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है।
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रांची/4.3.26। झारखंड में टाटा की तरफ से एक बार फिर बड़ा निवेश का फैसला लिया गया है। ये सहमति मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात के बाद टाटा समूह ने लिया है। औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार और टाटा समूह के बीच महत्वपूर्ण पहल हुई है। सोमवार को मुख्यमंत्री Hemant Soren के साथ हुई बैठक में N. Chandrasekaran ने राज्य में कई नए क्षेत्रों में निवेश करने की सहमति जताई। इस बैठक को राज्य के औद्योगिक परिदृश्य के लिए अहम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने टाटा समूह से ज्ञान आधारित उद्योगों—जैसे आईटी, रिसर्च, नवाचार और स्किल डेवलपमेंट—में निवेश का आग्रह किया। टाटा समूह ने इस दिशा में संभावनाओं पर सकारात्मक रुख दिखाया और आगे विचार करने की बात कही। माना जा रहा है कि यदि यह पहल साकार होती है तो झारखंड में पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आधुनिक और तकनीकी क्षेत्रों का भी विस्तार होगा।
बैठक में स्टील उद्योग को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। समूह की प्रमुख कंपनी Tata Steel ने स्टील निर्माण में नई तकनीक के उपयोग और अनुसंधान की शुरुआत की जानकारी दी। इसके लिए 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी गई है। इस निवेश का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना है।
बैठक के बाद एन. चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा समूह झारखंड में हाइड्रोजन आधारित ट्रकों के निर्माण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना Jamshedpur में संचालित की जा रही है और इसे भविष्य की परिवहन जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। हाइड्रोजन ट्रक पर्यावरण के लिहाज से बेहतर विकल्प माने जा रहे हैं, जिससे राज्य को ग्रीन एनर्जी सेक्टर में भी बढ़त मिल सकती है।
वहीं होटल उद्योग में भी टाटा समूह निवेश करने की योजना बना रहा है। रांची में होटल व्यवसाय की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है। यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। समूह का मानना है कि रांची के बाद अन्य जिलों में भी इस तरह की पहल की जा सकती है।
एन. चंद्रशेखरन ने यह भी कहा कि टाटा समूह राज्य सरकार के विभिन्न विकास कार्यक्रमों में सहभागी बनना चाहता है। रणनीतिक दृष्टिकोण से झारखंड को निवेश के लिए उपयुक्त माना जा रहा है, क्योंकि यहां प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ औद्योगिक आधार पहले से मौजूद है।बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक टी.वी. नरेंद्रन, कॉरपोरेट सर्विसेज के उपाध्यक्ष डी.बी. सुंदररामन और रांची के चीफ रेजिडेंट एग्जीक्यूटिव संजय मोहन श्रीवास्तव भी उपस्थित थे।




