रांची विवि में सिंडिकेट की बैठक नहीं, 3 माह से नियुक्ति अटकी

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विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की बहाली के लिए सात साल पहले निकली वैकेंसी एक अभ्यर्थी के लिए लंबी कानूनी लड़ाई में बदल गई। नागपुरी विषय में डॉ. मनोज कुमार को अकादमिक मूल्यांकन में 72.10 अंक मिले थे, जो उस विषय में सबसे अधिक थे। योग्यता के पैमाने पर वे सबसे आगे थे। इसके बावजूद 2021 में जब इंटरव्यू के लिए शॉर्ट लिस्ट जारी हुई, तो उनका नाम उसमें नहीं था। बाद में रिजल्ट में भी नाम शामिल नहीं किया गया। यहीं से डॉ. मनोज ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामला सिंगल बेंच से डबल बेंच और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। तीनों स्तरों पर फैसला उनके पक्ष में आया। अदालत ने नियुक्ति का आदेश दिया और जेपीएससी पर एक लाख रुपए का आर्थिक दंड लगाया। यह राशि अभ्यर्थी को दी जा चुकी है। जेपीएससी ने अदालत के आदेश के बाद नियुक्ति की अनुशंसा रांची विश्वविद्यालय को भेज दी। लेकिन अब प्रस्ताव विश्वविद्यालय में लंबित है। अंतिम स्वीकृति सिंडिकेट से होनी है, जिसकी बैठक लंबे समय से नहीं हुई है। नियमानुसार हर माह सिंडिकेट की बैठक होनी चाहिए, लेकिन पिछले कई महीनों से यह बैठक नहीं हुई। नियुक्ति से पूर्व सिंडिकेट की स्वीकृति जरूरीजेपीएससी की अनुशंसा के बावजूद नियुक्ति प्रस्ताव रांची विवि में लंबित है। नियुक्ति से पहले सिंडिकेट की स्वीकृति जरूरी है। 3 माह से स्वीकृति का इंतजार किया जा रहा है। विवि एक्ट के अनुसार हर माह सिंडिकेट की बैठक होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने से मामला अटका है। जेपीएससी का तर्क है कि अभ्यर्थी ने 150 रुपए का आवेदन शुल्क ऑनलाइन जमा नहीं कराया। वहीं डॉ. मनोज का कहना है कि शुल्क ऑनलाइन जमा कराया था। जमा शुल्क राशि खाते से कट भी गई थी। इसकी पर्ची भी जमा करा दी गई गई थी। अदालतों ने इन सब तथ्यों के आधार पर उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला दिया। अदालत की सख्त टिप्पणी…पद खाली रखा जाए: हाईकोर्ट ने कहा था कि जेपीएससी रिजल्ट जारी कर सकता है, लेकिन एक पद डॉ. मनोज के मामले में अंतिम निर्णय तक खाली रखा जाए। अंतिम निर्णय डॉ मनोज के पक्ष में आया। अदालत ने आयोग पर एक लाख का दंड लगाया और राशि अभ्यर्थी को देने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। उम्मीद है जल्द नियुक्ति मिलेगी: डॉ. मनोज का कहना है कि सर्वाधिक अकादमिक अंक होने के बावजूद उनका नाम इंटरव्यू सूची में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अदालत के आदेश के बाद जेपीएससी ने नियुक्ति की अनुशंसा कर दी है। अब प्रस्ताव सिंडिकेट में लंबित है। अब जल्द नियुक्ति मिलने की उम्मीद है।

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