राजगीर में सूखते गर्म जल के कुंडों की जांच होगी:सदन में पर्यटन मंत्री ने की घोषणा, कहा- संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है

Date:


ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से विश्व विख्यात राजगीर की पहचान कहे जाने वाले गर्म जल के कुंडों के अस्तित्व पर गहरा संकट मंडरा रहा है। 22 कुंडों और 52 धाराओं वाली इस पावन नगरी में जल का प्रवाह लगातार कम होने और कई कुंडों के पूरी तरह सूख जाने की खबरों ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। बुधवार को विधान परिषद में पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि विभाग इन कुंडों की विस्तृत जांच कराएगा। एमएलसी नागेंद्र कुमार की ओर से उठाए गए प्रश्न का उत्तर देते हुए पर्यटन मंत्री ने कहा कि राजगीर के कुंड केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये बिहार के प्रमुख पर्यटन स्तंभों में से एक हैं। इनका संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही राजगीर का स्थलीय निरीक्षण करेगी और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर इन प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। ब्रह्मकुंड को छोड़ अधिकांश कुंडों की स्थिति दयनीय वर्तमान स्थिति की बात करें तो सप्तधारा और ब्रह्मकुंड को छोड़कर अधिकांश कुंडों में गर्म जल का प्रवाह लगभग बंद हो चुका है। ब्रह्मकुंड क्षेत्र में स्थित गंगा-जमुना कुंड, मार्कंडेय कुंड और व्यास कुंड में अब पानी नाममात्र का बचा है। सबसे भयावह स्थिति सूर्य कुंड क्षेत्र की है, जहां राम-लक्ष्मण और अहिल्या कुंड की धाराएं करीब-करीब दम तोड़ चुकी हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, जहाँ कभी जल की अविरल धारा बहती थी, वहां अब एक बाल्टी पानी भरने में घंटों का समय लग रहा है। भीषण ठंड के मौसम में जब यह हाल है, तो आने वाली गर्मियों में स्थिति और भी विकराल होने की आशंका है। 15 मई से लगने वाले मलमास मेले पर संशय आगामी 15 मई से राजगीर में विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले का आयोजन होना है। एक माह तक चलने वाले इस मेले में देश-दुनिया से करोड़ों श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा वसु द्वारा निर्मित इन 22 कुंडों में स्नान का विशेष महत्व है। अगर समय रहते इन कुंडों में जल का प्रवाह सुचारू नहीं किया गया, तो इस ऐतिहासिक मेले की रौनक फीकी पड़ सकती है। विदित हो कि इन कुंडों के जल का तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस रहता है और सल्फर युक्त होने के कारण इसे चर्म रोगों के लिए लाभकारी माना जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Join Us WhatsApp