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रामगढ़ मनरेगा कर्मचारी संघ ने झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिला समाहरणालय के समक्ष दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मनरेगा कर्मियों की सेवा नियमित करने, ग्रेड-पे देने और लंबित मानदेय के तत्काल भुगतान की मांग को लेकर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुरेंद्र प्रसाद ने की, जबकि संचालन युगेश्वर रविदास ने किया। मनरेगा कर्मी पिछले 18 वर्षों से अल्प मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कृषि विभाग के मनरेगा सेल (रांची) के कर्मियों को ग्रेड-पे दिया जा रहा है, जबकि उनके साथ आर्थिक विषमता और मानसिक प्रताड़ना का व्यवहार हो रहा है। रामगढ़ जिले सहित राज्य के सभी जिलों में पिछले छह से बारह माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे कर्मी भुखमरी की स्थिति में हैं। आर्थिक तंगी के कारण अब तक 116 मनरेगा कर्मियों की मृत्यु हो चुकी है। संघ का कहना है कि इन मौतों के कारण कई परिवार बेघर हो गए हैं और सड़क पर आ गए हैं। कर्मियों का आक्रोश पिछले वर्ष ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन पर कोई कार्रवाई न होने के कारण बढ़ा है। मंत्री ने मानदेय में वृद्धि का आश्वासन दिया था, लेकिन उस पर आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया। मनरेगा कर्मियों की प्रमुख मांगें ग्रेड-पे के साथ सेवा का नियमितीकरण, सामाजिक सुरक्षा का लाभ प्रदान करना, मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी देना, उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार, 10 वर्ष से अधिक कार्य करने वाले संविदा कर्मियों को नियमित किया जाए (मनरेगा कर्मी 18 वर्षों से कार्यरत हैं) और 5 से 12 महीनों तक के बकाया लंबित मानदेय का अविलंब भुगतान किया जाए। धरना प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद, सचिव कुमार विवेक, रीता बेसरा, महेश कुमार, गणेश ठाकुर, बालेश्वर महतो, अब्दुल कलाम, राजकपूर राम, महेंद्र नाथ मुंडा, दशरथ यादव, मो. जरिफ, ललित राम और संदीप सहित कई मनरेगा कर्मी उपस्थित रहे।
रामगढ़ में मनरेगा कर्मियों का दो दिवसीय धरना:सेवा नियमित करने और बकाया मानदेय की मांग
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