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रिम्स में वर्षों से चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। हर दो-तीन महीने में एक-दो चिकित्सक सेवानिवृत्त हो रहे हैं, लेकिन उनके स्थान पर नई नियुक्ति नहीं हो पा रही है। इसके कारण रिम्स में वरिष्ठ चिकित्सकों के कई पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। साल 2024 में असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर प्रोफेसर तक के पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए 23 विभागों में कुल 43 पदों पर बहाली होनी थी। फिलहाल इन पदों के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन स्थिति यह है कि 23 विभागों में से केवल 13 विभागों के उम्मीदवारों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है। बताया जा रहा है कि शेष 10 विभागों में आवेदन तो आए थे, लेकिन उम्मीदवार निर्धारित योग्यता पूरी नहीं कर सके। इसके कारण उनके आवेदन खारिज कर दिए गए। ऐसे में इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी रिम्स को कुछ विभागों में ही स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर मिल पाएंगे, जबकि कई विभाग पहले की तरह खाली ही रह जाएंगे। जानकारी के अनुसार, फरवरी से अलग-अलग तिथियों पर विभिन्न विभागों के लिए साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं। 13 मार्च को ऑर्थोपेडिक और ट्रॉमा ऑर्थोपेडिक, 20 मार्च को ट्रॉमा एनेस्थीसिया, 27 मार्च को सीटीवीएस, नेफ्रोलॉजी और स्किन विभाग तथा 3 अप्रैल को मेडिसिन और कार्डियोलॉजी विभाग के लिए साक्षात्कार निर्धारित है। 2024 में प्रबंधन ने स्थायी नियुक्ति के लिए निकाली थी वैकेंसी रिम्स प्रबंधन ने स्थायी नियुक्ति के लिए मार्च 2024 में 156 पदों पर रिक्तियां निकाली थीं। इसमें प्रोफेसर के 37, एडिशनल प्रोफेसर के 9, एसोसिएट प्रोफेसर के 56, असिस्टेंट प्रोफेसर के 43 और मेडिकल ऑफिसर के 11 पद शामिल हैं। न्यूरो सर्जरी विभाग में सबसे ज्यादा विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में वर्तमान में केवल डॉ. आनंद प्रकाश ही वरिष्ठ चिकित्सक और एचओडी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके अलावा पूरा विभाग मुख्य रूप से सीनियर और जूनियर रेजिडेंट के भरोसे चल रहा है। मरीजों की संख्या के लिहाज से भी न्यूरो सर्जरी विभाग रिम्स के सबसे व्यस्त विभागों में शामिल है। यहां हर दिन करीब 10 से 15 नए मरीज भर्ती होते हैं, जिससे विभाग पर काम का दबाव लगातार बना रहता है। न्यूरो सर्जरी के अलावा ऑर्थोपेडिक, सर्जरी, सीटीवीएस, ऑन्कोलॉजी और पीडियाट्रिक समेत कई अन्य विभागों में भी वरिष्ठ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। ऐसे में मरीजों के इलाज और विभागीय कार्यों के संचालन में चिकित्सकों को अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ढाई साल में 24 डॉक्टर हुए रिटायर मेडिसिन : डॉ. जेके मित्रा, डॉ. सीबी शर्मा, डॉ. विद्यापति, डॉ. बी कुमार, डॉ. संजय सिंह सर्जरी : डॉ. आरजी बाखला, डॉ. विनय प्रताप, डॉ. आरएस शर्मा, डॉ. मृत्युंजय सरावगी, डॉ. शीतल मलुआ न्यूरो सर्जरी : डॉ. अनिल कुमार, डॉ. सीबी सहाय ईएनटी : डॉ. पीके सिंह, डॉ. सीके बिरूआ एफएमटी : डॉ. चंद्रशेखर पीडियाट्रिक : डॉ. अमर वर्मा, डॉ. मिनी रानी अखौरी नेत्र रोग : डॉ. राजीव कुमार गुप्ता ऑर्थोपेडिक : डॉ. एलबी मांझी स्त्री रोग : डॉ. सरिता तिर्की, डॉ. शशि बाला सिंह पैथोलॉजी : डॉ. एके श्रीवास्तव चर्म रोग : डॉ. एसके चौधरी, डॉ. डीके मिश्रा इन विभागों के लिए चल रहा इंटरव्यू विभाग — पद — पहुंचे उम्मीदवार
पैथोलॉजी — 02 — 08
साइकियाट्री — 01 — 04
स्त्री रोग विभाग — 02 — 05
सामान्य सर्जरी — 02 — 08
पीडियाट्रिक सर्जरी — 01 — 01
ऑर्थोपेडिक — 02 — 03
ट्रॉमा ऑर्थोपेडिक — 02 — 06
ट्रॉमा एनेस्थीसिया — 02 — 08
सीटीवीएस — 05 — 03
नेफ्रोलॉजी — 02 — 02
स्किन विभाग — 01 — 02
मेडिसिन — 03 — 07
कार्डियोलॉजी — 01 — 01 इन विभागों में आवेदन तो आए, लेकिन उम्मीदवार योग्य नहीं पाए गए :
न्यूरोसर्जरी, एनेस्थीसिया, यूरोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, नियोनेटोलॉजी, न्यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, कार्डियक एनेस्थीसिया और ट्रॉमा न्यूरोसर्जरी।
रिम्स : विज्ञापन के 2 साल बाद इंटरव्यू, फिर भी 10 विभागों को नहीं मिले डॉक्टर
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