‘वीबी-जी राम जी कानून को रद्द करे सरकार…’, मनरेगा की फिर से बहाली के लिए CM सिद्धारमैया ने पेश किया प्रस्ताव

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कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को विधानसभा में मनरेगा योजना और वीबी-जी राम जी कानून को लेकर एक प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव में केंद्र से नए ग्रामीण रोजगार कानून वीबी-जी राम जी कानून को तुरंत रद्द करने और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) काल की मनरेगा योजना को उसके मूल रूप में बहाल करने का आग्रह किया गया. इस दौरान विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसका कड़ा विरोध किया.

विधानसभा में प्रस्ताव पेश करते हुए बोले CM सिद्धारमैया

राज्य के विधानसभा में यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुद पेश किया. विधानसभा में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा, ‘कर्नाटक के ग्रामीण लोगों के जीवन के अधिकार की रक्षा के लिए, यह सदन केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह तुरंत वीबी-जी राम जी अधिनियम को रद्द करे, जो संघीय सिद्धांत के खिलाफ है, राज्य के खजाने पर एक गंभीर बोझ है और विकेंद्रीकरण के सिद्धांत के खिलाफ है.’

उन्होंने कहा, ‘इसने ग्राम पंचायतों की शक्तियों और अधिकारों को छीन लिया है और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल रूप में बहाल करे, जिससे ग्रामीण संपत्ति का निर्माण हुआ है और गरीबों में आत्मनिर्भरता आई है.’

प्रस्ताव में VB-G RAM G कानून लाने का किया विरोध

यह उल्लेख करते हुए कि भारतीय लोकतंत्र की नींव पंचायती राज प्रणाली और सत्ता के विकेंद्रीकरण के सिद्धांतों के प्रति विधानसभा अपनी पूरी प्रतिबद्धता दोहराती है. सिद्धारमैया ने कहा, ‘यह सदन मनरेगा को खत्म करने को गंभीरता से लेता है, जो ग्रामीण गरीबों के लिए एक संजीवनी थी और ग्रामीण जीवन का एक अभिन्न अंग थी.’ प्रस्ताव में कहा गया, ‘यह सदन केंद्र के इस कदम (मनरेगा को खत्म करके वीबी-जी-राम जी अधिनियम लाने) का कड़ा विरोध करता है.’

विपक्ष ने प्रस्ताव पर जताई आपत्ति, किया विरोध

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा, ‘यह मत कहिए कि सदन इसका कड़ा विरोध करता है. कहिए कि सरकार विरोध करती है. हमें इसमें शामिल मत कीजिए.’

हालांकि, मुख्यमंत्री प्रस्ताव पढ़ते रहे और कहा कि विपक्षी सदस्य प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अपनी आपत्तियां उठा सकते हैं. इससे विपक्षी सदस्य नाराज हो गए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की.

यह भी पढ़ेंः ‘मीलॉर्ड सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है’, ये दलील सुनकर भी SC ने क्यों दे दी शराब घोटाले के आरोपी को अंतरिम जमानत



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